नक्षत्र से नाम के अक्षर (नामाक्षर)

कई परिवार बच्चे का नाम उस अक्षर से आरंभ करते हैं जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र और पाद का होता है। जन्म की तारीख़, समय और स्थान लिखें; यह साधन छपे होड़ा चक्र से वह अक्षर स्रोत सहित दिखाता है।

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नाम के अक्षर

अक्षर कैसे तय होता है

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, और हर नक्षत्र 3°20′ के चार पादों में। इस तरह 108 पाद बनते हैं, हर राशि में नौ।

होड़ा (अवकहड़ा) चक्र हर पाद को एक अक्षर देता है। जन्म के समय चंद्रमा जिस पाद में था, उसका अक्षर नाम का परंपरागत पहला अक्षर है।

यदि परिवार को नक्षत्र और पाद पहले से ज्ञात हैं, तो नीचे की सारणी से अक्षर सीधे देखा जा सकता है।

सभी 27 नक्षत्रों और 108 पादों के नाम के अक्षर

बालबोध ज्योतिषसार संग्रह (1914), पृष्ठ 14 पर छपे होड़ा चक्र से। हर पाद की राशि कोष्ठक में दी गई है।

नक्षत्र1 पाद2 पाद3 पाद4 पाद
अश्विनी (Ashwini) चू (Chu) (मेष)चे (Che) (मेष)चो (Cho) (मेष)ला (La) (मेष)
भरणी (Bharani) ली (Li) (मेष)लू (Lu) (मेष)ले (Le) (मेष)लो (Lo) (मेष)
कृत्तिका (Krittika) आ (A) (मेष)ई (I) (वृषभ)ऊ (U) (वृषभ)ए (E) (वृषभ)
रोहिणी (Rohini) ओ (O) (वृषभ)वा (Va) (वृषभ)वी (Vi) (वृषभ)वू (Vu) (वृषभ)
मृगशिरा (Mrigashira) वे (Ve) (वृषभ)वो (Vo) (वृषभ)का (Ka) (मिथुन)की (Ki) (मिथुन)
आर्द्रा (Ardra) कू (Ku) (मिथुन)घ (Gha) (मिथुन)ङ (Nga) (मिथुन)छ (Chha) (मिथुन)
पुनर्वसु (Punarvasu) के (Ke) (मिथुन)को (Ko) (मिथुन)हा (Ha) (मिथुन)ही (Hi) (कर्क)
पुष्य (Pushya) हू (Hu) (कर्क)हे (He) (कर्क)हो (Ho) (कर्क)डा (Da) (कर्क)
आश्लेषा (Ashlesha) डी (Di) (कर्क)डू (Du) (कर्क)डे (De) (कर्क)डो (Do) (कर्क)
मघा (Magha) मा (Ma) (सिंह)मी (Mi) (सिंह)मू (Mu) (सिंह)मे (Me) (सिंह)
पूर्व फाल्गुनी (Purva Phalguni) मो (Mo) (सिंह)टा (Ta) (सिंह)टी (Ti) (सिंह)टू (Tu) (सिंह)
उत्तर फाल्गुनी (Uttara Phalguni) टे (Te) (सिंह)टो (To) (कन्या)पा (Pa) (कन्या)पी (Pi) (कन्या)
हस्त (Hasta) पू (Pu) (कन्या)ष (Sha) (कन्या)ण (Na) (कन्या)ठ (Tha) (कन्या)
चित्रा (Chitra) पे (Pe) (कन्या)पो (Po) (कन्या)रा (Ra) (तुला)री (Ri) (तुला)
स्वाती (Swati) रू (Ru) (तुला)रे (Re) (तुला)रो (Ro) (तुला)ता (Ta) (तुला)
विशाखा (Vishakha) ती (Ti) (तुला)तू (Tu) (तुला)ते (Te) (तुला)तो (To) (वृश्चिक)
अनुराधा (Anuradha) ना (Na) (वृश्चिक)नी (Ni) (वृश्चिक)नू (Nu) (वृश्चिक)ने (Ne) (वृश्चिक)
ज्येष्ठा (Jyeshtha) नो (No) (वृश्चिक)या (Ya) (वृश्चिक)यी (Yi) (वृश्चिक)यू (Yu) (वृश्चिक)
मूल (Mula) ये (Ye) (धनु)यो (Yo) (धनु)भा (Bha) (धनु)भी (Bhi) (धनु)
पूर्वाषाढा (Purva Ashadha) भु (Bhu) (धनु)ध (Dha) (धनु)फ (Pha) (धनु)ढा (Dha) (धनु)
उत्तराषाढा (Uttara Ashadha) भे (Bhe) (धनु)भो (Bho) (मकर)जा (Ja) (मकर)जी (Ji) (मकर)
श्रवण (Shravana) खी (Khi) (मकर)खू (Khu) (मकर)खे (Khe) (मकर)खो (Kho) (मकर)
धनिष्ठा (Dhanishta) गा (Ga) (मकर)गी (Gi) (मकर)गू (Gu) (कुम्भ)गे (Ge) (कुम्भ)
शतभिषा (Shatabhisha) गो (Go) (कुम्भ)सा (Sa) (कुम्भ)सी (Si) (कुम्भ)सू (Su) (कुम्भ)
पूर्व भाद्रपदा (Purva Bhadrapada) से (Se) (कुम्भ)सो (So) (कुम्भ)दा (Da) (कुम्भ)दी (Di) (मीन)
उत्तर भाद्रपदा (Uttara Bhadrapada) दू (Du) (मीन)थ (Tha) (मीन)झ (Jha) (मीन)ञ (Nya) (मीन)
रेवती (Revati) दे (De) (मीन)दो (Do) (मीन)चा (Cha) (मीन)ची (Chi) (मीन)

चक्र के 28 नक्षत्रों वाले रूप में अभिजित् के अक्षर “जू”, “जे”, “जो”, “खा” भी दिए हैं। अभिजित् उत्तराषाढा के अंतिम पाद और श्रवण के पहले पंद्रहवें भाग में आता है। जब चंद्रमा वहाँ हो, तो यह साधन इन अक्षरों को दूसरे पाठ के रूप में दिखाता है। कई आधुनिक सूचियाँ इन्हें श्रवण के अंतर्गत देती हैं। (जू, जे, जो, खा)

जहाँ स्रोतों में अंतर है

1931 से पहले के दो संस्करण और तीन आधुनिक सूचियाँ 108 में से 92 पादों पर सहमत हैं। जहाँ अंतर है, वहाँ यह पृष्ठ 1914 की सारणी का पाठ देता है:

जन्म समय, समय-क्षेत्र और सीमा के पास का समय

जन्म की तारीख़ के लिए घड़ी का अंतर अंतरराष्ट्रीय समय-क्षेत्र डेटाबेस से आता है, इसलिए पुरानी तारीख़ों पर उस समय के नियम लगते हैं (उदाहरण: भारत में 1942 से 1945 तक +6:30)। परिणाम में प्रयुक्त अंतर दिखाया जाता है। यदि परिवार की घड़ी स्थानीय समय पर चलती थी, जैसे 1955 से पहले बंबई समय, तो वह अंतर स्वयं लिखें।

चंद्रमा लगभग छह घंटे में एक पाद पार करता है। जब जन्म समय किसी सीमा से लगभग पाँच मिनट के भीतर हो, तो परिणाम यह बताता है और सीमा के पार की गणना भी दिखाता है, क्योंकि लिखे हुए जन्म समय में अक्सर कुछ मिनट का अंतर होता है।

यदि जन्म समय ज्ञात नहीं है, तो यह साधन उस दिन चंद्रमा के सभी पाद स्थानीय समय के साथ दिखाता है, और कोई एक नहीं चुनता। पारिवारिक पुरोहित निर्णय में सहायता कर सकते हैं।

चंद्रमा की स्थिति जन्म के क्षण के लिए निकाली जाती है, उसी लाहिरी अयनांश से जो इस साइट की हर पंचांग तारीख़ में है। 1900 से 2100 तक किसी भी तारीख़ के लिए यह नासा JPL के DE440 पंचांग से लगभग 4 कला-विकला के भीतर मिलती है, जिससे पाद की सीमा 10 सेकंड से कम खिसकती है।

स्रोत

दोनों संस्करण सार्वजनिक हैं और archive.org पर पृष्ठ-दर-पृष्ठ पढ़े जा सकते हैं। आधुनिक सूचियाँ केवल अंतर खोजने के लिए देखी गईं।

परिवार इन अक्षरों को अलग-अलग ढंग से अपनाते हैं, और कई परिवार नाम चुनने से पहले अपने पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श करते हैं।

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