एकादशी व्रत
अजा एकादशी 2027: तिथि, पारण का समय और व्रत कथा
अजा एकादशी 2027 नई दिल्ली में शनिवार, 28 अगस्त को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत रविवार, 29 अगस्त को सुबह 5:57 से 8:31 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह शुक्रवार, 27 अगस्त को है (स्मार्त नियम)।
रविवार, 29 अगस्त को सुबह 5:57 से सुबह 8:31 के बीच व्रत खोलें।
- व्रत
शनिवार, 28 अगस्त 2027
नई दिल्ली। स्मार्त और वैष्णव, दोनों नियमों में यही दिन।
- व्रत खोलें
रविवार, 29 अगस्त 2027, सुबह 5:57–सुबह 8:31
स्मार्त नियम।
- अमेरिका में व्रत
शुक्रवार, 27 अगस्त 2027
वॉशिंगटन डीसी, वही नियम।
वैष्णव पारण: रविवार, 29 अगस्त, सुबह 5:57–9:36।
यह समय क्यों
सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)।
व्रत का दिन
नई दिल्ली में आज का दिन
- सूर्योदय: सुबह 5:57
- राहु काल: सुबह 9:09 से 10:45 तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 तक
- एकादशी समाप्त: दोपहर 12:42, फिर द्वादशी
- सूर्यास्त: शाम 6:47
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 6:47 से रात 9:01 तक
- अगला सूर्योदय: सुबह 5:57, अगले दिन
- नक्षत्र: आर्द्रा सुबह 8:33 तक
- नक्षत्र: पुनर्वसु 29 अगस्त, सुबह 6:18 तक
कल, रविवार, 29 अगस्त: व्रत खोलें
तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।
तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।
नक्षत्र 27 तारा-समूहों में चंद्रमा का स्थान है।
नक्षत्र 27 तारा-समूहों में चंद्रमा का स्थान है।
दिन के आठ बराबर भागों में से एक, जो वार से तय होता है। बहुत से परिवार इसमें नया काम शुरू नहीं करते। यह पंचांग का तथ्य है, भविष्यवाणी नहीं।
दिन के पंद्रह बराबर भागों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास।
सूर्यास्त के बाद रात का पहला भाग। लक्ष्मी पूजा जैसी संध्या पूजाएँ इसी में होती हैं।
सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
अजा एकादशी नई दिल्ली में शनिवार, 28 अगस्त 2027 को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत रविवार, 29 अगस्त 2027 को सुबह 5:57 – सुबह 8:31 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह शुक्रवार, 27 अगस्त 2027 को है (स्मार्त नियम)।
इस पृष्ठ के शब्द
- पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
- चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
- स्मार्त नियम और वैष्णव नियम
- पर्व या व्रत का दिन तय करने के दो परंपराओं के नियम। ये अलग दिन दें, तो हमारे पृष्ठ दोनों दिन दिखाते हैं और नियम का नाम देते हैं।
- पारण
- व्रत को उसके नियम के बताए समय में खोलना। एकादशी का पारण: अगले दिन, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले।
- हरि वासर
- द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। एकादशी का पारण इसमें नहीं होता।
- अरुणोदय
- सूर्योदय से पहले की भोर। वैष्णव एकादशी के नियम में सूर्योदय से पहले के 96 मिनट (चार घटी)।
अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण; पूर्णिमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण
अन्य नाम: अन्नदा एकादशी
अजा भाद्रपद (अमांत पंचांग में श्रावण) कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जन्माष्टमी के कुछ दिन बाद। इसकी कथा राजा हरिश्चंद्र की है, जिन्होंने सब कुछ खोकर भी सत्य नहीं छोड़ा।
पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया। स्रोत देखें
कब पड़ती है
नई दिल्ली के लिए अगली: शनिवार, 28 अगस्त 2027। पारण: रविवार, 29 अगस्त 2027, सुबह 5:57 – सुबह 8:31। अन्य शहरों में अंतर हो सकता है। 2027 की हर एकादशी शहर के अनुसार।
कथा
हरिश्चंद्र पूरी पृथ्वी के सम्राट थे, जो अपने वचन के पक्के होने के लिए हर जगह जाने जाते थे। पिछले किसी कर्म के कारण उनका राज्य चला गया। एक वचन निभाने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्र को, और फिर स्वयं को, बेच दिया। वे श्मशान के रखवाले के सेवक बन गए, और उनका काम मृतकों के वस्त्र इकट्ठे करना था। वहाँ भी उन्होंने सत्य नहीं छोड़ा।
बहुत वर्ष बीत गए, और वे दुख से भरे रहे। वे सोचते कि क्या करें और कहाँ जाएँ। एक दिन गौतम मुनि वहाँ से निकले। हरिश्चंद्र ने उन्हें प्रणाम करके सब कुछ बताया। द्रवित होकर गौतम ने कहा कि सात दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा नाम की एकादशी आएगी, और वे उसे उपवास और रात्रि-जागरण के साथ रखें।
हरिश्चंद्र ने ठीक वैसे ही व्रत रखा जैसा मुनि ने कहा था। उनका दुख समाप्त हो गया। वे अपनी पत्नी से फिर मिले, और उनके पुत्र को, जिसकी मृत्यु हो गई थी, फिर से जीवन मिला। स्वर्ग में नगाड़े बजे और फूल बरसे। हरिश्चंद्र को उनका राज्य लौटा दिया गया, और अंत में वे अपने पूरे नगर के साथ स्वर्ग गए। ग्रंथ कहता है कि यह व्रत दुख से मुक्त करता है; यह ग्रंथ का अपना कथन है, जिसे यहाँ उसके कथन के रूप में दिया गया है।
व्रत अपनी इच्छा से रखा जाता है। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह वाले, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।
कथा कहाँ से आई
स्रोत
- एकादशी का नाम और मास: पूजादीप पंचांग की नाम-तालिका
- पद्म पुराण, उत्तर खंड, आनंदाश्रम संस्करण (पूना, 1894), अध्याय 58, पृष्ठ 1366–1367
- एकादशी माहात्म्य (पुणे, जगद्धितेच्छु प्रेस, 1890), पत्र 76–77
परिवारों के प्रश्न
एकादशी का व्रत कब खोलें?
व्रत खोलने को पारण कहते हैं। नई दिल्ली में अजा एकादशी का पारण: रविवार, 29 अगस्त 2027, सुबह 5:57 – सुबह 8:31। सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ अलग क्यों हो सकती हैं?
हर परंपरा का अपना नियम है। स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। वैष्णव नियम (गौड़ीय): अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) से सूर्योदय तक एकादशी रहती है। हम तिथियाँ कैसे निकालते हैं
और एकादशियाँ
स्रोत और लाइसेंस
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखा गया, और उन्हीं से मिलाया गया। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
- जाँच
- दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 14 अक्टूबर 2026।
- अद्यतन
- 15 अक्टूबर 2026