एकादशी व्रत
जया एकादशी 2027: तिथि, पारण का समय और व्रत कथा
जया एकादशी 2027 नई दिल्ली में बुधवार, 17 फ़रवरी को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत गुरुवार, 18 फ़रवरी को सुबह 6:57 से 9:12 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह मंगलवार, 16 फ़रवरी को है (स्मार्त नियम)।
गुरुवार, 18 फ़रवरी को सुबह 6:57 से सुबह 9:12 के बीच व्रत खोलें।
- व्रत
बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
नई दिल्ली। स्मार्त और वैष्णव, दोनों नियमों में यही दिन।
- व्रत खोलें
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027, सुबह 6:57–सुबह 9:12
स्मार्त नियम।
- अमेरिका में व्रत
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2027
वॉशिंगटन डीसी, वही नियम।
वैष्णव पारण: गुरुवार, 18 फ़रवरी, सुबह 6:57–10:42।
यह समय क्यों
सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)।
व्रत का दिन
नई दिल्ली में आज का दिन
- सूर्योदय: सुबह 6:58
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:57 तक। कई पंचांग बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं मानते। अभिजित मुहूर्त और राहु काल दोपहर 12:35 से 12:57 तक साथ पड़ते हैं।
- राहु काल: दोपहर 12:35 से 1:59 तक
- एकादशी समाप्त: शाम 5:32, फिर द्वादशी
- सूर्यास्त: शाम 6:12
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 6:12 से रात 8:45 तक
- अगला सूर्योदय: सुबह 6:57, अगले दिन
- नक्षत्र: आर्द्रा रात 11:29 तक
- नक्षत्र: पुनर्वसु 18 फ़रवरी, रात 9:06 तक
कल, गुरुवार, 18 फ़रवरी: व्रत खोलें
तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।
तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।
नक्षत्र 27 तारा-समूहों में चंद्रमा का स्थान है।
नक्षत्र 27 तारा-समूहों में चंद्रमा का स्थान है।
दिन के आठ बराबर भागों में से एक, जो वार से तय होता है। बहुत से परिवार इसमें नया काम शुरू नहीं करते। यह पंचांग का तथ्य है, भविष्यवाणी नहीं।
दिन के पंद्रह बराबर भागों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास। कई पंचांग बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं मानते। अभिजित मुहूर्त और राहु काल दोपहर 12:35 से 12:57 तक साथ पड़ते हैं।
सूर्यास्त के बाद रात का पहला भाग। लक्ष्मी पूजा जैसी संध्या पूजाएँ इसी में होती हैं।
सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
जया एकादशी नई दिल्ली में बुधवार, 17 फ़रवरी 2027 को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 को सुबह 6:57 – सुबह 9:12 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह मंगलवार, 16 फ़रवरी 2027 को है (स्मार्त नियम)।
इस पृष्ठ के शब्द
- पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
- चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
- स्मार्त नियम और वैष्णव नियम
- पर्व या व्रत का दिन तय करने के दो परंपराओं के नियम। ये अलग दिन दें, तो हमारे पृष्ठ दोनों दिन दिखाते हैं और नियम का नाम देते हैं।
- पारण
- व्रत को उसके नियम के बताए समय में खोलना। एकादशी का पारण: अगले दिन, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले।
- हरि वासर
- द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। एकादशी का पारण इसमें नहीं होता।
- अरुणोदय
- सूर्योदय से पहले की भोर। वैष्णव एकादशी के नियम में सूर्योदय से पहले के 96 मिनट (चार घटी)।
माघ शुक्ल (अमांत और पूर्णिमांत दोनों पंचांगों में यही मास)
जया का अर्थ है "विजय"। यह माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा स्वर्ग के दो संगीतकारों की है जिन्होंने स्वर्ग में अपना स्थान खो दिया और बिना सोचे-समझे रखे गए एक व्रत से उसे फिर पा लिया।
पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया। स्रोत देखें
कब पड़ती है
नई दिल्ली के लिए अगली: बुधवार, 17 फ़रवरी 2027। पारण: गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027, सुबह 6:57 – सुबह 9:12। अन्य शहरों में अंतर हो सकता है। 2027 की हर एकादशी शहर के अनुसार।
कथा
इंद्र के स्वर्ग में नंदन वन में गंधर्व गाते और अप्सराएँ नृत्य करती थीं। उनमें चित्रसेन की पुत्री पुष्पवती और पुष्पदंत का पुत्र माल्यवान भी थे। एक दिन इंद्र के सामने गाते-नाचते हुए वे केवल एक-दूसरे के बारे में सोच रहे थे। उनका सुर और ताल बिगड़ गया, और संगीत टूट गया।
इंद्र क्रोधित हुए और उन्हें पिशाच, यानी भटकती आत्माओं, के रूप में रहने के लिए पृथ्वी पर भेज दिया। वे हिमालय पहुँचे, जहाँ कड़ाके की ठंड थी। दुखी होकर वे बर्फ़ में भटकते रहे।
माघ शुक्ल एकादशी को वे इतने दुखी थे कि उन्होंने कुछ भी नहीं खाया, जल नहीं पिया और किसी जीव को कष्ट नहीं दिया। वे एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए, और ठंड के कारण रात भर जागते रहे। अनजाने में उन्होंने जया एकादशी का व्रत और जागरण कर लिया था। अगले दिन सूर्योदय पर वे मुक्त हो गए, और उन्हें अपने तेजस्वी रूप फिर मिल गए। वे इंद्र के पास लौटे, जिन्होंने पूछा कि वे कैसे मुक्त हुए। जब उन्होंने बताया, तो इंद्र ने कहा कि जो हरि के भक्त हैं, वे देवताओं से भी सम्मान के योग्य हैं।
व्रत अपनी इच्छा से रखा जाता है। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह वाले, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।
कथा कहाँ से आई
स्रोत
- एकादशी का नाम और मास: पूजादीप पंचांग की नाम-तालिका
- पद्म पुराण, उत्तर खंड, आनंदाश्रम संस्करण (पूना, 1894), अध्याय 45, पृष्ठ 1343–1344
परिवारों के प्रश्न
एकादशी का व्रत कब खोलें?
व्रत खोलने को पारण कहते हैं। नई दिल्ली में जया एकादशी का पारण: गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027, सुबह 6:57 – सुबह 9:12। सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।
स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ अलग क्यों हो सकती हैं?
हर परंपरा का अपना नियम है। स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। वैष्णव नियम (गौड़ीय): अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) से सूर्योदय तक एकादशी रहती है। हम तिथियाँ कैसे निकालते हैं
और एकादशियाँ
स्रोत और लाइसेंस
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखा गया, और उन्हीं से मिलाया गया। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
- जाँच
- दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 14 अक्टूबर 2026।
- अद्यतन
- 15 अक्टूबर 2026