एकादशी व्रत

विजया एकादशी 2027: तिथि, पारण का समय और व्रत कथा

विजया एकादशी 2027 नई दिल्ली में बुधवार, 3 मार्च को है (स्मार्त नियम)। वैष्णव नियम से नई दिल्ली में यह गुरुवार, 4 मार्च को है। नई दिल्ली में व्रत गुरुवार, 4 मार्च को दोपहर 2:02 से शाम 4:02 के बीच खोलें (स्मार्त नियम)। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी यह बुधवार, 3 मार्च को ही है (स्मार्त नियम)।

गुरुवार, 4 मार्च को दोपहर 2:02 से शाम 4:02 के बीच व्रत खोलें (स्मार्त नियम)।

  • व्रत

    बुधवार, 3 मार्च 2027

    नई दिल्ली। स्मार्त नियम।

  • व्रत खोलें

    गुरुवार, 4 मार्च 2027, दोपहर 2:02–शाम 4:02

    स्मार्त नियम।

  • वैष्णव नियम

    गुरुवार, 4 मार्च 2027

    वैष्णव नियम से व्रत। शुक्रवार, 5 मार्च, सुबह 6:42 – सुबह 9:54 व्रत खोलें।

अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी व्रत बुधवार, 3 मार्च को ही है (स्मार्त नियम)।

वैष्णव पारण: शुक्रवार, 5 मार्च, सुबह 6:42–9:54।

यह समय क्यों

हरि वासर प्रातःकाल के बाद समाप्त होता है; मध्याह्न में पारण नहीं किया जाता, इसलिए मध्याह्न के बाद, अपराह्न (दिन के पाँच भागों में चौथा) के भीतर, उसके अंत से पहले व्रत खोलें।

स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। अगले सूर्योदय पर भी एकादशी है: परिवार पहले दिन व्रत रखते हैं; दूसरा दिन संन्यासियों और मोक्ष चाहने वालों के लिए बताया गया है।

व्रत का दिन

नई दिल्ली में आज का दिन

कृष्ण एकादशी 4 मार्च, सुबह 7:24 तक · अगले सूर्योदय पर भी रहती है (वृद्धि)

  • सूर्योदय: सुबह 6:44
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:56 तक। कई पंचांग बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं मानते। अभिजित मुहूर्त और राहु काल दोपहर 12:33 से 12:56 तक साथ पड़ते हैं।
  • राहु काल: दोपहर 12:33 से 2:00 तक
  • सूर्यास्त: शाम 6:22
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 6:22 से रात 8:50 तक
  • अगला सूर्योदय: सुबह 6:43, अगले दिन
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढा रात 10:35 तक
  • नक्षत्र: उत्तराषाढा 5 मार्च, रात 1:36 तक
  • कृष्ण एकादशी इस सूर्योदय और अगले सूर्योदय, दोनों पर है (वृद्धि), इसलिए अगले दिन भी एकादशी है।

कल, गुरुवार, 4 मार्च: व्रत खोलें

सूर्योदय सुबह 6:43सूर्यास्त शाम 6:22
व्रत खोलें दोपहर 2:02–शाम 4:02 (स्मार्त नियम)

हरि वासर प्रातःकाल के बाद समाप्त होता है; मध्याह्न में पारण नहीं किया जाता, इसलिए मध्याह्न के बाद, अपराह्न (दिन के पाँच भागों में चौथा) के भीतर, उसके अंत से पहले व्रत खोलें।

विजया एकादशी नई दिल्ली में बुधवार, 3 मार्च 2027 को है (स्मार्त नियम)। वैष्णव नियम से गुरुवार, 4 मार्च 2027। नई दिल्ली में व्रत गुरुवार, 4 मार्च 2027 को दोपहर 2:02 – शाम 4:02 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी यह बुधवार, 3 मार्च 2027 को ही है (स्मार्त नियम)।

इस पृष्ठ के शब्द

पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
स्मार्त नियम और वैष्णव नियम
पर्व या व्रत का दिन तय करने के दो परंपराओं के नियम। ये अलग दिन दें, तो हमारे पृष्ठ दोनों दिन दिखाते हैं और नियम का नाम देते हैं।
पारण
व्रत को उसके नियम के बताए समय में खोलना। एकादशी का पारण: अगले दिन, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले।
हरि वासर
द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। एकादशी का पारण इसमें नहीं होता।
अरुणोदय
सूर्योदय से पहले की भोर। वैष्णव एकादशी के नियम में सूर्योदय से पहले के 96 मिनट (चार घटी)।

पंचांग के सभी शब्द

अमांत पंचांग में माघ कृष्ण; पूर्णिमांत पंचांग में फाल्गुन कृष्ण

विजया का अर्थ भी "विजय" है। यह फाल्गुन (अमांत पंचांग में माघ) कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा राम की है, जिन्होंने लंका जाने से पहले समुद्र के तट पर यह व्रत रखा।

पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया। स्रोत देखें

कब पड़ती है

नई दिल्ली के लिए अगली: बुधवार, 3 मार्च 2027 (वैष्णव: गुरुवार, 4 मार्च 2027)। पारण: गुरुवार, 4 मार्च 2027, दोपहर 2:02 – शाम 4:02। अन्य शहरों में अंतर हो सकता है। 2027 की हर एकादशी शहर के अनुसार।

कथा

यह कथा ब्रह्मा ने नारद को सुनाई। जब राम अपनी सेना के साथ समुद्र के तट पर पहुँचे, तो उन्हें गहरे जल के पार जाने का कोई मार्ग नहीं दिखा, और उन्होंने लक्ष्मण से पूछा कि क्या करें। लक्ष्मण ने उन्हें बकदाल्भ्य मुनि के बारे में बताया, जिनका आश्रम आधे योजन की दूरी पर था। राम मुनि के पास गए, प्रणाम किया और उनसे सलाह माँगी।

मुनि ने उन्हें फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया नाम की एकादशी रखने को कहा और उसकी विधि बताई। एक दिन पहले सोने, चाँदी, ताँबे या मिट्टी का एक कलश जल से भरकर पत्तों से सजाएँ, और उस पर नारायण की प्रतिमा रखें। एकादशी को फूल, धूप और दीप से कलश की पूजा करें, उपवास रखें, और उसके सामने रात भर जागें। अगले दिन सूर्योदय पर कलश को किसी नदी या सरोवर पर ले जाकर फिर पूजा करें, और उसे किसी विद्वान ब्राह्मण को दे दें।

राम ने अपने साथियों के साथ ठीक वैसे ही व्रत रखा जैसे मुनि ने सिखाया था। फिर उन्होंने समुद्र पार किया, लंका में युद्ध जीता और सीता को घर ले आए। ग्रंथ कहता है कि यह व्रत विजय देता है; यह ग्रंथ का अपना कथन है, जिसे यहाँ उसके कथन के रूप में दिया गया है।

व्रत अपनी इच्छा से रखा जाता है। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह वाले, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।

कथा कहाँ से आई

स्रोत

परिवारों के प्रश्न

एकादशी का व्रत कब खोलें?

व्रत खोलने को पारण कहते हैं। नई दिल्ली में विजया एकादशी का पारण: गुरुवार, 4 मार्च 2027, दोपहर 2:02 – शाम 4:02। हरि वासर प्रातःकाल के बाद समाप्त होता है; मध्याह्न में पारण नहीं किया जाता, इसलिए मध्याह्न के बाद, अपराह्न (दिन के पाँच भागों में चौथा) के भीतर, उसके अंत से पहले व्रत खोलें।

स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ अलग क्यों हो सकती हैं?

हर परंपरा का अपना नियम है। स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। अगले सूर्योदय पर भी एकादशी है: परिवार पहले दिन व्रत रखते हैं; दूसरा दिन संन्यासियों और मोक्ष चाहने वालों के लिए बताया गया है। वैष्णव नियम (गौड़ीय): उन्मीलनी महाद्वादशी; व्रत इसी एकादशी के दिन रखा जाता है। हम तिथियाँ कैसे निकालते हैं

और एकादशियाँ

स्रोत और लाइसेंस

हमारी व्याख्या
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जाँच
दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 14 अक्टूबर 2026।
अद्यतन
15 अक्टूबर 2026

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