एकादशी व्रत

उत्पन्ना एकादशी 2026: तिथि, पारण का समय और व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी 2026 नई दिल्ली में शुक्रवार, 4 दिसंबर को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत शनिवार, 5 दिसंबर को सुबह 6:59 से 9:04 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी यह शुक्रवार, 4 दिसंबर को ही है (स्मार्त नियम)।

शनिवार, 5 दिसंबर को सुबह 6:59 से सुबह 9:04 के बीच व्रत खोलें।

  • व्रत

    शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026

    नई दिल्ली। स्मार्त और वैष्णव, दोनों नियमों में यही दिन।

  • व्रत खोलें

    शनिवार, 5 दिसंबर 2026, सुबह 6:59–सुबह 9:04

    स्मार्त नियम।

अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी व्रत शुक्रवार, 4 दिसंबर को ही है (स्मार्त नियम)।

वैष्णव पारण: शनिवार, 5 दिसंबर, सुबह 6:59–10:27।

यह समय क्यों

सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)।

व्रत का दिन

नई दिल्ली में आज का दिन

कृष्ण एकादशी रात 11:45 तक, फिर द्वादशी

  • सूर्योदय: सुबह 6:58
  • राहु काल: सुबह 10:53 से दोपहर 12:11 तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:32 तक। अभिजित मुहूर्त और राहु काल सुबह 11:50 से दोपहर 12:11 तक साथ पड़ते हैं।
  • सूर्यास्त: शाम 5:23
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 5:23 से रात 8:06 तक
  • एकादशी समाप्त: रात 11:45, फिर द्वादशी
  • अगला सूर्योदय: सुबह 6:59, अगले दिन
  • नक्षत्र: हस्त सुबह 10:23 तक
  • नक्षत्र: चित्रा 5 दिसंबर, सुबह 11:49 तक

कल, शनिवार, 5 दिसंबर: व्रत खोलें

सूर्योदय सुबह 6:59सूर्यास्त शाम 5:23
व्रत खोलें सुबह 6:59–सुबह 9:04 (स्मार्त नियम)

सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

उत्पन्ना एकादशी नई दिल्ली में शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत शनिवार, 5 दिसंबर 2026 को सुबह 6:59 – सुबह 9:04 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में भी यह शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को ही है (स्मार्त नियम)।

इस पृष्ठ के शब्द

पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
स्मार्त नियम और वैष्णव नियम
पर्व या व्रत का दिन तय करने के दो परंपराओं के नियम। ये अलग दिन दें, तो हमारे पृष्ठ दोनों दिन दिखाते हैं और नियम का नाम देते हैं।
पारण
व्रत को उसके नियम के बताए समय में खोलना। एकादशी का पारण: अगले दिन, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले।
हरि वासर
द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। एकादशी का पारण इसमें नहीं होता।
अरुणोदय
सूर्योदय से पहले की भोर। वैष्णव एकादशी के नियम में सूर्योदय से पहले के 96 मिनट (चार घटी)।

पंचांग के सभी शब्द

अमांत पंचांग में कार्तिक कृष्ण; पूर्णिमांत पंचांग में मार्गशीर्ष कृष्ण

उत्पन्ना का अर्थ है "जो उत्पन्न हुई"। यह एकादशी बताती है कि स्वयं एकादशी कैसे प्रकट हुई, इसलिए जो परिवार एकादशी का व्रत आरंभ करना चाहते हैं, उनमें से बहुत से इसी से आरंभ करते हैं। पद्म पुराण में यह पहली एकादशी है जिसका वर्णन कृष्ण युधिष्ठिर से करते हैं।

पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया। स्रोत देखें

कब पड़ती है

नई दिल्ली के लिए अगली: शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026। पारण: शनिवार, 5 दिसंबर 2026, सुबह 6:59 – सुबह 9:04। अन्य शहरों में अंतर हो सकता है। 2026 की हर एकादशी शहर के अनुसार।

कथा

बहुत समय पहले तालजंघ का पुत्र मुर नाम का एक शक्तिशाली असुर चंद्रावती नगर से राज करता था। उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया, और वे सहायता के लिए विष्णु के पास गए। विष्णु देवताओं के हज़ार वर्षों तक मुर और उसकी सेनाओं से लड़े। फिर थककर वे हिमालय में बदरिकाश्रम गए और सिंहावती नाम की एक बड़ी गुफा में विश्राम करने लेट गए, जिसका केवल एक द्वार था।

मुर उनके पीछे गुफा में आया और उन्हें सोते पाया। उसी क्षण विष्णु के अपने शरीर से एक तेजस्वी, शस्त्रधारी कन्या प्रकट हुई। उसने मुर का सामना किया, और केवल एक हुंकार से उसे भस्म कर दिया।

जब विष्णु जागे और देखा कि क्या हुआ, तो वे प्रसन्न हुए और उसे वर देना चाहा। उसने माँगा कि जो लोग भक्ति से उसके दिन उपवास रखें, उन्हें सही जीवन और मोक्ष की ओर सहायता मिले। विष्णु ने उसका नाम एकादशी, यानी "ग्यारहवीं", रखा और कहा कि उसका दिन उन्हें सदा प्रिय रहेगा। ग्रंथ कहता है कि जो श्रद्धा से यह व्रत रखता है वह विष्णु के लोक को जाता है; यह ग्रंथ का अपना कथन है, जिसे यहाँ उसके कथन के रूप में दिया गया है।

व्रत अपनी इच्छा से रखा जाता है। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह वाले, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।

कथा कहाँ से आई

स्रोत

परिवारों के प्रश्न

एकादशी का व्रत कब खोलें?

व्रत खोलने को पारण कहते हैं। नई दिल्ली में उत्पन्ना एकादशी का पारण: शनिवार, 5 दिसंबर 2026, सुबह 6:59 – सुबह 9:04। सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ अलग क्यों हो सकती हैं?

हर परंपरा का अपना नियम है। स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। वैष्णव नियम (गौड़ीय): अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) से सूर्योदय तक एकादशी रहती है। हम तिथियाँ कैसे निकालते हैं

और एकादशियाँ

स्रोत और लाइसेंस

हमारी व्याख्या
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जाँच
दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 14 अक्टूबर 2026।
अद्यतन
15 अक्टूबर 2026

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