एकादशी व्रत

मोक्षदा एकादशी 2026: तिथि, पारण का समय और व्रत कथा

मोक्षदा एकादशी 2026 नई दिल्ली में रविवार, 20 दिसंबर को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत सोमवार, 21 दिसंबर को सुबह 7:09 से 9:13 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह शनिवार, 19 दिसंबर को है (स्मार्त नियम)।

सोमवार, 21 दिसंबर को सुबह 7:09 से सुबह 9:13 के बीच व्रत खोलें।

  • व्रत

    रविवार, 20 दिसंबर 2026

    नई दिल्ली। स्मार्त और वैष्णव, दोनों नियमों में यही दिन।

  • व्रत खोलें

    सोमवार, 21 दिसंबर 2026, सुबह 7:09–सुबह 9:13

    स्मार्त नियम।

  • अमेरिका में व्रत

    शनिवार, 19 दिसंबर 2026

    वॉशिंगटन डीसी, वही नियम।

वैष्णव पारण: सोमवार, 21 दिसंबर, सुबह 7:09–10:35।

यह समय क्यों

सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)।

व्रत का दिन

नई दिल्ली में आज का दिन

शुक्ल एकादशी रात 8:15 तक, फिर द्वादशी

  • सूर्योदय: सुबह 7:08
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:39 तक
  • राहु काल: शाम 4:10 से 5:28 तक
  • सूर्यास्त: शाम 5:28
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 5:28 से रात 8:12 तक
  • एकादशी समाप्त: रात 8:15, फिर द्वादशी
  • अगला सूर्योदय: सुबह 7:09, अगले दिन
  • नक्षत्र: अश्विनी दोपहर 2:56 तक
  • नक्षत्र: भरणी 21 दिसंबर, दोपहर 1:09 तक

कल, सोमवार, 21 दिसंबर: व्रत खोलें

सूर्योदय सुबह 7:09सूर्यास्त शाम 5:28
व्रत खोलें सुबह 7:09–सुबह 9:13 (स्मार्त नियम)

सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

मोक्षदा एकादशी नई दिल्ली में रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है (स्मार्त नियम)। नई दिल्ली में व्रत सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को सुबह 7:09 – सुबह 9:13 के बीच खोलें। अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) में यह शनिवार, 19 दिसंबर 2026 को है (स्मार्त नियम)।

इस पृष्ठ के शब्द

पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
स्मार्त नियम और वैष्णव नियम
पर्व या व्रत का दिन तय करने के दो परंपराओं के नियम। ये अलग दिन दें, तो हमारे पृष्ठ दोनों दिन दिखाते हैं और नियम का नाम देते हैं।
पारण
व्रत को उसके नियम के बताए समय में खोलना। एकादशी का पारण: अगले दिन, सूर्योदय और हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्त होने से पहले।
हरि वासर
द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। एकादशी का पारण इसमें नहीं होता।
अरुणोदय
सूर्योदय से पहले की भोर। वैष्णव एकादशी के नियम में सूर्योदय से पहले के 96 मिनट (चार घटी)।

पंचांग के सभी शब्द

मार्गशीर्ष शुक्ल (अमांत और पूर्णिमांत दोनों पंचांगों में यही मास)

अन्य नाम: गीता जयंती

मोक्षदा का अर्थ है "मोक्ष देने वाली"। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है, और यही दिन गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन भगवद्गीता कही गई। पद्म पुराण में इसे केवल मोक्षा कहा गया है, और इसकी कथा एक पुत्र की है जो अपने पिता की सहायता करता है।

पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया। स्रोत देखें

कब पड़ती है

नई दिल्ली के लिए अगली: रविवार, 20 दिसंबर 2026। पारण: सोमवार, 21 दिसंबर 2026, सुबह 7:09 – सुबह 9:13। अन्य शहरों में अंतर हो सकता है। 2026 की हर एकादशी शहर के अनुसार।

वैकुंठ एकादशी 2026: शहर के अनुसार तारीख़ और पारण का समय

कथा

चंपक नगर में वैखानस नाम का एक अच्छा राजा रहता था, जो अपनी प्रजा की देखभाल वैसे करता था जैसे पिता अपने बच्चों की करता है। एक रात उसने सपने में देखा कि उसके अपने पिता मृतकों के लोक में कष्ट पा रहे हैं। वह व्याकुल होकर जागा और अपने दरबार के विद्वान ब्राह्मणों को बुलाया। उन्होंने उसे पर्वत मुनि के आश्रम जाने को कहा, जो भूत और भविष्य देख सकते थे।

राजा गया, मुनि को प्रणाम किया और उन्हें सपना बताया। पर्वत मुनि कुछ देर ध्यान में बैठे। फिर उन्होंने कहा कि राजा के पिता अपने जीवन में अहंकारी थे और जब उनकी अपनी पत्नी को उनकी आवश्यकता थी तब उन्होंने उसका साथ नहीं दिया, और इसी कारण वे अब कष्ट पा रहे हैं।

राजा ने पूछा कि वह क्या कर सकता है। पर्वत मुनि ने उसे परिवार के साथ मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षा नाम की एकादशी रखने और उसका पुण्य अपने पिता को देने को कहा। राजा ने घर जाकर मुनि के कहे अनुसार उपवास और रात्रि-जागरण किया, और अंत में उसका पुण्य अपने पिता को दे दिया। आकाश से फूल बरसे। उसके पिता मुक्त होकर स्वर्ग की ओर चले और जाते हुए अपने पुत्र को आशीर्वाद दिया।

कथा के इस रूप के बारे में

पद्म पुराण के इस संस्करण में राजा का नाम वैखानस है; संपादक की मिलाई एक पांडुलिपि में वैश्वानर है। दिन की बाकी बातें गीता जयंती की मार्गदर्शिका में हैं।

गीता जयंती: परिवार यह दिन कैसे मनाते हैं

व्रत अपनी इच्छा से रखा जाता है। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह वाले, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।

कथा कहाँ से आई

स्रोत

परिवारों के प्रश्न

एकादशी का व्रत कब खोलें?

व्रत खोलने को पारण कहते हैं। नई दिल्ली में मोक्षदा एकादशी का पारण: सोमवार, 21 दिसंबर 2026, सुबह 7:09 – सुबह 9:13। सूर्योदय के बाद, प्रातःकाल (दिन के पाँच भागों में पहला) के भीतर व्रत खोलें।

स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ अलग क्यों हो सकती हैं?

हर परंपरा का अपना नियम है। स्मार्त नियम: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, उस दिन व्रत रखें (सूर्योदय के समय दशमी हो तो वह दिन छोड़ दिया जाता है)। वैष्णव नियम (गौड़ीय): अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) से सूर्योदय तक एकादशी रहती है। हम तिथियाँ कैसे निकालते हैं

और एकादशियाँ

स्रोत और लाइसेंस

हमारी व्याख्या
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जाँच
दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 14 अक्टूबर 2026।
अद्यतन
15 अक्टूबर 2026

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