गणेश जी ने लिखा महाभारत

3-6 वर्ष की आयु

व्यास मुनि के मन में एक बहुत लंबी कथा है, और उन्हें उसे लिखने वाला चाहिए। गणेश जी लिखने को तैयार होते हैं, पर इस शर्त पर कि व्यास जी बोलना बंद न करें; और व्यास जी मान जाते हैं, इस शर्त पर कि गणेश जी हर पंक्ति समझकर ही लिखें।

पूजादीप के लिए लिखा गया, और नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाया गया।

रंगीन छापा चित्र: गणेश जी पालथी मारकर बैठे हैं और लंबे पन्नों पर लिख रहे हैं। पास में दवात है और उनका चूहा भी।
महाभारत लिखते गणेश जी। कोलकाता का हाथ से रंगा छापा चित्र, 1878–83। चित्र: “Ganesha transcribing the Mahabharata (Shri Shri Ganesh)”, 1878–83। The Metropolitan Museum of Art, 2021.205। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त, CC0)। संग्रहालय की पुरानी कलाकृति।

कहानी

बहुत पुरानी बात है। व्यास नाम के एक ज्ञानी मुनि थे। उन्होंने अपने मन में एक बहुत, बहुत बड़ी कथा रची थी। वह थी महाभारत, दुनिया की सबसे लंबी कविताओं में से एक।

पर एक मुश्किल थी। कथा इतनी लंबी थी कि व्यास जी को कोई ऐसा चाहिए था जो उसे पूरा लिख सके। इतनी तेज़ी से और इतना सुंदर कौन लिख सकता था?

तभी सृष्टि रचने वाले ब्रह्मा जी उनसे मिलने आए। बोले, “गणेश जी से कहो। वे तुम्हारे लिए लिखेंगे।”

तो व्यास जी ने गणेश जी को याद किया, और गणेश जी झट से आ पहुँचे। व्यास जी ने पूछा, “क्या आप मेरी कथा लिखेंगे?”

गणेश जी मुस्कुराए। बोले, “हाँ, लिखूँगा। पर मेरी कलम एक पल को भी नहीं रुकनी चाहिए। आपको बिना रुके कथा सुनाते रहना होगा।”

व्यास जी भी मुस्कुराए। बोले, “ठीक है। पर आप हर पंक्ति का अर्थ समझकर ही उसे लिखेंगे।” गणेश जी ने कहा, “ॐ!” यानी, हाँ।

तो व्यास जी कथा सुनाने लगे, और गणेश जी लिखने लगे। सर-सर-सर उनकी कलम चली, तेज़, और तेज़, और भी तेज़!

जब भी व्यास जी को सोचने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता, वे एक बहुत उलझी हुई पंक्ति बोल देते। तब बुद्धिमान गणेश जी को भी रुककर सोचना पड़ता कि इसका अर्थ क्या है। और जब तक गणेश जी सोचते, व्यास जी आगे की कथा गढ़ लेते।

दिन पर दिन ऐसे ही चलता रहा। और आख़िर पूरा महाभारत लिख लिया गया, ताकि सब उसे पढ़ सकें। बहुत से परिवार इस कथा से यह भाव लेते हैं कि बड़े काम वही करते हैं जो ध्यान से सुनते हैं और लिखने से पहले सोचते हैं।

साथ मिलकर करने के लिए

"व्यास और गणेश" खेल खेलिए। एक व्यक्ति बिना रुके छोटी-सी कहानी सुनाए, और दूसरा जितनी तेज़ी से हो सके उसे लिखे या चित्र बनाए। फिर बारी बदलिए। अगर सुनाने वाले को सोचने का समय चाहिए, तो वह एक पहेली पूछ सकता है, और लिखने वाले को रुककर सोचना पड़ेगा!

गणेश चतुर्थी: जिस पर्व से यह कहानी जुड़ी है

और कहानियाँ

बड़ों के लिए

कहानी ऊपर पूरी हुई। यहाँ बड़ों के लिए: परिवार इसे किन दूसरे ढंगों से सुनाते हैं, और यह किन ग्रंथों से ली गई है।

कहानी में क्या अंतर मिलता है, और यह कहाँ से आई

कहानी में क्या अंतर मिलता है

पूरे भारत में बहुत से परिवार यह भी जोड़ते हैं कि लिखते-लिखते गणेश जी की कलम टूट गई, तो उन्होंने अपना एक दाँत तोड़कर उसी से लिखना जारी रखा। इसीलिए गणेश जी को अक्सर एक टूटे दाँत के साथ दिखाया जाता है। यह बात बहुत सी कथाओं में बड़े प्रेम से सुनाई जाती है, पर महाभारत के उस प्रसंग में नहीं है। गणेश जी के लेखक बनने का प्रसंग आम तौर पर छपने वाले महाभारत में मिलता है; पुणे के समीक्षित संस्करण के विद्वान इसे बाद में जोड़ा गया मानते हैं।

कहानी कहाँ से आई

  • महाभारत, आदि पर्व, अध्याय 1 (अनुक्रमणिका), प्रचलित कलकत्ता और बंबई पाठ में: व्यास, ब्रह्मा का आना, गणेश की शर्त और उसके बदले व्यास की शर्त, कठिन श्लोक; पुणे का समीक्षित संस्करण इस अंश को बाद में जुड़ा मानकर परिशिष्ट में रखता है
  • महाभारत, आदि पर्व, अध्याय 1, गांगुली का अंग्रेज़ी अनुवाद (कलकत्ता, 1884), पृष्ठ 4–6

स्रोत

  • महाभारत, आदि पर्व, अध्याय 1, गांगुली का अंग्रेज़ी अनुवाद (1884), पृष्ठ 4–6

परिवारों के प्रश्न

स्रोत और लाइसेंस

हमारी व्याख्या
इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखा गया, और उन्हीं से मिलाया गया। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
जाँच
दिए गए स्रोतों से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।

सभी स्रोत और लाइसेंस

इस पृष्ठ की त्रुटि बताएँ · सुधार