भोपाल। शहर बदलें

आज का पंचांग: मंगलवार, 3 नवंबर, भोपाल

कार्तिक कृष्ण नवमी (पूर्णिमांत), विक्रम संवत 2083 (गुजराती कार्तिकादि: 2082)

कृष्ण नवमी सुबह 11:55 तक। सूर्योदय सुबह 6:26, सूर्यास्त शाम 5:40। राहु काल दोपहर 2:52–शाम 4:16।

सूर्योदय सुबह 6:25, सूर्यास्त शाम 5:42। राहु काल शाम 4:17–5:42। पूरा दिन

भोपाल में आज का दिन

कृष्ण सप्तमी दोपहर 2:52 तक, फिर अष्टमी

  • सूर्योदय: सुबह 6:25
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:41 से दोपहर 12:26 तक
  • सप्तमी समाप्त: दोपहर 2:52, फिर अष्टमी
  • राहु काल: शाम 4:17 से 5:42 तक
  • सूर्यास्त: शाम 5:42
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 5:42 से रात 8:14 तक
  • अगला सूर्योदय: सुबह 6:26, अगले दिन
  • नक्षत्र: पुष्य 2 नवंबर, सुबह 4:31 तक
  • नक्षत्र: आश्लेषा 3 नवंबर, रात 3:47 तक
सप्तमी दोपहर 2:52 तक

तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।

आने वाले दिन

पूरा पंचांग देखें
  1. गुरुवार5नवंबररमा एकादशी, व्रत
  2. शुक्रवार6नवंबरधनतेरस, पर्व
  3. शनिवार7नवंबरछोटी दिवाली, पर्व।अभ्यंग स्नान (नरक चतुर्दशी) की सुबह: कुछ पंचांग छोटी दिवाली इसी दिन देते हैं: रविवार 8 नवंबर
  4. रविवार8नवंबरदीपावली (लक्ष्मी पूजा); नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान); काली पूजा, पर्व
  5. मंगलवार10नवंबरगोवर्धन पूजा; बेसतुं वरस, पर्व

रविवार की प्रार्थना

आदित्यहृदयम्

रीति अलग-अलग है; हर दिन की प्रार्थना आप बदल सकते हैं।

आज का श्लोक

भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥

कृष्ण अध्याय पूरा करते हैं। वे कहते हैं कि जो उन्हें सब यज्ञों और तपों का भोक्ता, सब लोकों का महान ईश्वर और सब प्राणियों का सुहृद (मित्र) जान लेता है, वह शांति पाता है।

भगवद्गीता 5.29। भावार्थ।

इस पृष्ठ के शब्द

पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
तिथि
चंद्र दिवस: वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे निकलता है। चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
नक्षत्र
चंद्रमा के मार्ग पर आकाश के 27 बराबर भागों में से एक, हर भाग 13°20′ का, किसी तारा-समूह के नाम पर।
संवत: विक्रम और शक
वर्षों की गिनती। विक्रम संवत ईसवी सन से 56 या 57 वर्ष आगे है, और शक संवत 78 या 79 वर्ष पीछे।
अभिजित मुहूर्त
दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, जो स्थानीय दोपहर के आसपास आता है। कई पंचांग बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं मानते।
राहु काल
दिन के आठ बराबर भागों में से एक, जो वार से तय होता है।

पंचांग के सभी शब्द

भोपाल का आज का पंचांग (Aaj ka Panchang)। सभी समय स्थानीय हैं (भारतीय मानक समय)। इसी शहर के लिए गणना।

आज: मंगलवार, 3 नवंबर 2026

तिथि
कृष्ण नवमी (समाप्त सुबह 11:55), फिर दशमी (समाप्त सुबह 11:03, अगले दिन)
नक्षत्र
मघा (समाप्त रात 3:27, अगले दिन), फिर पूर्व फाल्गुनी (समाप्त रात 3:30, 2 दिन बाद) इस नक्षत्र के नाम-अक्षर
योग
शुक्ल (समाप्त सुबह 9:55), फिर ब्रह्म (समाप्त सुबह 8:01, अगले दिन)
करण
गरज (समाप्त सुबह 11:55), फिर वणिज (समाप्त रात 11:26), फिर विष्टि (भद्रा) (समाप्त सुबह 11:03, अगले दिन)
वार
मंगलवार
मास
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
तमिल मास
ऐप्पसि 17 (सौर मास)
संवत
विक्रम संवत 2083 (चैत्रादि) · विक्रम संवत (कार्तिकादि, गुजराती) 2082 · शक संवत 1948
सूर्योदय
सुबह 6:26
सूर्यास्त
शाम 5:40
चंद्रोदय
रात 1:50, अगले दिन
चंद्रास्त
दोपहर 1:52
राहु काल
दोपहर 2:52 – शाम 4:16
यमगण्ड
सुबह 9:15 – सुबह 10:39
गुलिक काल
दोपहर 12:03 – दोपहर 1:28
अभिजित मुहूर्त
सुबह 11:41 – दोपहर 12:26
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 4:44 – सुबह 5:35

भोपाल में अगले 7 दिन

तारीख़ तिथि नक्षत्र सूर्योदय सूर्यास्त
मंगलवार, 3 नवंबर कृष्ण · नवमी
समाप्त सुबह 11:55
मघा
समाप्त रात 3:27, अगले दिन
सुबह 6:26 शाम 5:40
बुधवार, 4 नवंबर कृष्ण · दशमी
समाप्त सुबह 11:03
पूर्व फाल्गुनी
समाप्त रात 3:30, अगले दिन
सुबह 6:27 शाम 5:40
गुरुवार, 5 नवंबर कृष्ण · एकादशी
समाप्त सुबह 10:36
उत्तर फाल्गुनी
समाप्त रात 3:56, अगले दिन
सुबह 6:27 शाम 5:39
शुक्रवार, 6 नवंबर कृष्ण · द्वादशी
समाप्त सुबह 10:31
हस्त
समाप्त सुबह 4:44, अगले दिन
सुबह 6:28 शाम 5:39
शनिवार, 7 नवंबर कृष्ण · त्रयोदशी
समाप्त सुबह 10:48
चित्रा
समाप्त सुबह 5:53, अगले दिन
सुबह 6:28 शाम 5:38
रविवार, 8 नवंबर कृष्ण · चतुर्दशी
समाप्त सुबह 11:28
स्वाती
समाप्त सुबह 7:24, अगले दिन
सुबह 6:29 शाम 5:38
सोमवार, 9 नवंबर कृष्ण · अमावस्या
समाप्त दोपहर 12:32
स्वाती
समाप्त सुबह 7:24
सुबह 6:30 शाम 5:37

भोपाल में आने वाले त्योहार

पर्वभोपाल में तारीख़यह भी
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर
कृष्ण त्रयोदशी सुबह 10:31, 6 नवंबर से सुबह 10:48, 7 नवंबर तक; प्रदोष काल शाम 5:39 से रात 8:13, 6 नवंबर तक; प्रदोष काल शाम 5:38 से रात 8:12, 7 नवंबर तक
–
दीपावली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर
लक्ष्मी पूजा शाम 5:38 – रात 8:12
अमावस्या आरंभ सुबह 11:28, 8 नवंबर; सूर्यास्त शाम 5:38, 8 नवंबर। अगले दिन अमावस्या समाप्त दोपहर 12:32, 9 नवंबर, यानी सूर्यास्त (शाम 5:37, 9 नवंबर) से पहले, इसलिए उस शाम अमावस्या नहीं है।
–
नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान) रविवार, 8 नवंबर
कृष्ण चतुर्दशी सुबह 10:48, 7 नवंबर से सुबह 11:28, 8 नवंबर तक; भोर से पहले का चंद्रोदय सुबह 5:31, 8 नवंबर
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काली पूजा (बंगाली परंपरा) रविवार, 8 नवंबर
अमावस्या सुबह 11:28, 8 नवंबर से दोपहर 12:32, 9 नवंबर तक; निशीथ काल 7 नवंबर की रात 11:38 से 12:29 तक; निशीथ काल 8 नवंबर की रात 11:38 से 12:29 तक
–
गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर
शुक्ल प्रतिपदा दोपहर 12:32, 9 नवंबर से दोपहर 2:00, 10 नवंबर तक; सूर्योदय सुबह 6:30, 10 नवंबर
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भोपाल में अगली एकादशी तिथियाँ

व्रत का दिन कैसे चुना जाता है · 2026 की सभी एकादशी तिथियाँ

भोपाल के लिए गणना, मंगलवार, 3 नवंबर 2026

भोपाल · 23.26° उत्तर, 77.41° पूर्व · भारतीय मानक समय

नियम: पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण वही हैं जो सूर्योदय पर प्रभावी हों, उनके समाप्ति-समय के साथ। सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है (मानक वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ)।

आपके स्थान के लिए गणना: NASA JPL की DE440 सारणियों और Astronomy Engine सॉफ़्टवेयर (MIT लाइसेंस) से, लाहिरी अयनांश के साथ। समय छपे पंचांगों से एक-दो मिनट अलग हो सकता है। व्रत और पूजा के समय के लिए अपने परिवार या मंदिर की परंपरा मानें।

हम गणना कैसे करते हैं

परिवारों के प्रश्न

राहु काल क्या है?

राहु काल पंचांग का एक हिस्सा है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है। बहुत से परिवार इस समय नया काम शुरू नहीं करते। यह भविष्यवाणी नहीं है, और यह साइट कोई भविष्यवाणी नहीं करती। भोपाल में आज: दोपहर 2:52 – शाम 4:16।

दूसरे शहर में समय अलग क्यों होते हैं?

तिथि या नक्षत्र पूरी दुनिया के लिए एक ही क्षण में बदलता है, पर हर शहर उस क्षण को अपनी घड़ी के समय पर देखता है, और सूर्योदय-सूर्यास्त भी शहर-शहर में अलग होते हैं। इस पृष्ठ का हर समय भोपाल के लिए है, स्थानीय समय (भारतीय मानक समय) में।

यह पृष्ठ कौन-सा पंचांग नियम मानता है?

पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण वही हैं जो सूर्योदय पर प्रभावी हों, उनके समाप्ति-समय के साथ। सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है (मानक वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ)। हम पंचांग कैसे निकालते हैं

भोपाल के पास हिंदू मंदिर

अभी हमारी मंदिर-सूची में केवल अमेरिका के मंदिर हैं। दूसरे देशों के मंदिर अभी सूची में नहीं हैं।

अमेरिका के हिंदू मंदिर, राज्य के अनुसार

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