हरे कृष्ण महामंत्र (अर्थ सहित)
कलिसंतरण उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद) से; रचयिता अज्ञात
हरे कृष्ण महामंत्र (Hare Krishna Mahamantra): हरे कृष्ण महामंत्र भगवान के सोलह नामों का जप है: हरे, राम और कृष्ण, बार-बार। इसे सिखाने वाला ग्रंथ कलिसंतरण उपनिषद् है, जो कृष्ण यजुर्वेद का एक बहुत छोटा उपनिषद् है। नाम का अर्थ है "कलियुग को पार करना"। इसमें नारद मुनि ब्रह्मा से पूछते हैं कि कलियुग के कष्टों को कैसे पार किया जाए, और ब्रह्मा सोलह नाम बताते हैं।
पाठ और शब्दार्थ
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ये चुनाव इसी ब्राउज़र में रहते हैं।
श्लोक 1
द्वापरान्ते नारदो ब्रह्माणं जगाम कथं भगवन् गां पर्यटन् कलिं संतरेयमिति ।स होवाच ब्रह्मा साधु पृष्टोऽस्मि सर्वश्रुतिरहस्यं गोप्यं तच्छृणु येन कलिसंसारं तरिष्यसि ।भगवत आदिपुरुषस्य नारायणस्य नामोच्चारणमात्रेण निर्धूतकलिर्भवतीति ॥
Dvaparante narado brahmanam jagama katham bhagavan gam paryatan kalim santareyamitiSa hovacha brahma sadhu prishtosmi sarvashrutirahasyam gopyam tachchhrinu yena kalisansaram tarishyasiBhagavata adipurushasya narayanasya namochcharanamatrena nirdhutakalirbhavatiti
IAST
dvāparānte nārado brahmāṇaṃ jagāma kathaṃ bhagavan gāṃ paryaṭan kaliṃ saṃtareyamiti |sa hovāca brahmā sādhu pṛṣṭo’smi sarvaśrutirahasyaṃ gopyaṃ tacchṛṇu yena kalisaṃsāraṃ tariṣyasi |bhagavata ādipuruṣasya nārāyaṇasya nāmoccāraṇamātreṇa nirdhūtakalirbhavatīti ||
भावार्थ द्वापर युग के अंत में नारद मुनि ब्रह्मा के पास गए और पूछा: "भगवन्, पृथ्वी पर घूमते हुए मैं कलियुग को कैसे पार करूँ?" ब्रह्मा ने कहा कि प्रश्न अच्छा है, और वे वह रहस्य बताएँगे जिसे सब वेद छिपाकर रखते हैं, जिससे वे कलि के संसार को पार कर लेंगे। पाठ कहता है कि आदिपुरुष भगवान नारायण का नाम बोलने मात्र से मनुष्य कलि के दोष से मुक्त हो जाता है।
English meaning At the end of the Dvapara age, the sage Narada went to Brahma and asked: "Lord, as I wander the earth, how can I cross over the Kali age?" Brahma answered that it was a good question, and that he would tell him the secret that all the Vedas keep, by which he would cross the world of Kali. The text says that a person shakes off Kali just by saying aloud the name of the Lord Narayana, the first being.
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- द्वापरान्ते dvāparānte · द्वापर युग के अंत में (समास, सप्तमी एकवचन) शब्दकोश: dvā-para, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 503, स्तंभ 3
N. of the 3rd of the 4 Yugas or ages of the world
; anta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 42, स्तंभ 3end, limit, boundary, term
- नारदः nāradaḥ · नारद मुनि (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: nārada, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 537, स्तंभ 2
- ब्रह्माणम् brahmāṇam · ब्रह्मा के पास (द्वितीया एकवचन (पुंलिंग)) शब्दकोश: brahman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 738, स्तंभ 1
Brahmā or the one impersonal universal Spirit manifested as a personal Creator
- जगाम jagāma · गए (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. gam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 347, स्तंभ 1
to go, move, go away, set out, come
- कथम् katham · कैसे? (अव्यय) शब्दकोश: katham, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 247, स्तंभ 2
how? in what manner? whence?
- भगवन् bhagavan · हे भगवन् (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. bhagavat, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 743, स्तंभ 3
glorious, illustrious, divine, adorable, venerable
- गाम् gām · पृथ्वी (द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: go, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 363, स्तंभ 3
the earth (as the milk-cow of kings)
- पर्यटन् paryaṭan · घूमते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: pary-aṭ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 607, स्तंभ 1
to roam or wander about, travel over
- कलिम् kalim · कलियुग (द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: kali, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 261, स्तंभ 3
N. of the last and worst of the four Yugas or ages
- संतरेयम् saṃtareyam · "पार करूँ" (विधिलिङ्, उत्तम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: saṃ-tṝ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1142, स्तंभ 3
to cross or traverse together, pass through
- इति iti · इस प्रकार (उद्धरण का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- सः saḥ · वे (सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- ह ha · निश्चय ही (प्राचीन गद्य का अव्यय) (अव्यय) शब्दकोश: 3. ha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1286, स्तंभ 1
indeed, assuredly, verily, of course, then &c.
- उवाच uvāca · बोले (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: vac, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 912, स्तंभ 1
to speak, say, tell, utter, announce, declare
- ब्रह्मा brahmā · ब्रह्मा (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: brahman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 738, स्तंभ 1
Brahmā or the one impersonal universal Spirit manifested as a personal Creator
- साधु sādhu · अच्छा! ठीक! (अव्यय) शब्दकोश: sādhu, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1201, स्तंभ 2
good! well done! bravo!
- पृष्टः pṛṣṭaḥ · पूछा गया (भूतकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: prach, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 658, स्तंभ 1
to ask, question, interrogate
- अस्मि asmi · "हूँ" (वर्तमान काल, उत्तम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. as, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 117, स्तंभ 2
to be, live, exist, be present
- सर्वश्रुतिरहस्यम् sarvaśrutirahasyam · सब वेदों का रहस्य (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; 1. śruti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1101, स्तंभ 3sacred knowledge orally transmitted by the Brāhmans from generation to generation, the Veda
; rahasya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 871, स्तंभ 2a secret, any secret doctrine or mystery
- गोप्यम् gopyam · गुप्त रखने योग्य (कृत्य प्रत्यय, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: gopya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 368, स्तंभ 3
to be kept secret or hidden
- तत् tat · वह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- शृणु śṛṇu · सुनो (लोट्, मध्यम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. śru, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1100, स्तंभ 3
to hear, listen or attend to anything
- येन yena · जिससे (संबंधवाचक सर्वनाम, तृतीया एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- कलिसंसारम् kalisaṃsāram · कलियुग का संसार (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: kali, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 261, स्तंभ 3
N. of the last and worst of the four Yugas or ages
; saṃ-sāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1119, स्तंभ 3transmigration, metempsychosis, the world, secular life, worldly illusion
- तरिष्यसि tariṣyasi · पार करोगे (लृट्, मध्यम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: tṝ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 454, स्तंभ 2
to pass across or over, cross over (a river)
- भगवतः bhagavataḥ · भगवान के (षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: 2. bhagavat, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 743, स्तंभ 3
glorious, illustrious, divine, adorable, venerable
- आदिपुरुषस्य ādipuruṣasya · आदिपुरुष के (समास, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: ādi-puruṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 137, स्तंभ 1
‘first man,’
- नारायणस्य nārāyaṇasya · नारायण के (षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- नामोच्चारणमात्रेण nāmoccāraṇamātreṇa · केवल नाम का उच्चारण करने से (समास, तृतीया एकवचन) शब्दकोश: nāman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 2
name, appellation
; uc-cāraṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 173, स्तंभ 2pronunciation, articulation, enunciation
; mātra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 804, स्तंभ 3the one thing and no more, often = nothing but, entirely, only
- निर्धूतकलिः nirdhūtakaliḥ · कलि के दोष से मुक्त (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: nir-dhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 555, स्तंभ 2
to shake, agitate, shake out or off, scatter, remove
; kali, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 261, स्तंभ 3N. of the last and worst of the four Yugas or ages
- भवति bhavati · हो जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 760, स्तंभ 2
to become, be
- इति iti · इस प्रकार (अंश का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
1 छपाई में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- शब्द 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: हरिः ॐ ॥ द्वापरान्ते … पर्यटन्कलिं संतरेयमिति । … निर्धूतकलिर्भवति । 1925 की छपाई 'हरिः ॐ' से शुरू होती है, 'पर्यटन्कलिं' को जोड़कर लिखती है, और यह अंश 'इति' के बिना 'निर्धूतकलिर्भवति' पर समाप्त करती है।
श्लोक 2
नारदः पुनः पप्रच्छ तन्नाम किमिति । स होवाच हिरण्यगर्भः ।हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥इति षोडशकं नाम्नां कलिकल्मषनाशनम् ।नातः परतरोपायः सर्ववेदेषु दृश्यते ॥षोडशकलाऽऽवृतस्य जीवस्यावरणविनाशनम् । ततः प्रकाशते परं ब्रह्म मेघापाये रविरश्मिमण्डलीवेति ॥
Naradah punah paprachchha tannama kimiti, sa hovacha hiranyagarbhahHare rama hare rama rama rama hare hareHare krishna hare krishna krishna krishna hare hareIti shodashakam namnam kalikalmashanashanamNatah parataropayah sarvavedeshu drishyateShodashakalavritasya jivasyavaranavinashanam, tatah prakashate param brahma meghapaye ravirashmimandaliveti
IAST
nāradaḥ punaḥ papraccha tannāma kimiti | sa hovāca hiraṇyagarbhaḥ |hare rāma hare rāma rāma rāma hare hare |hare kṛṣṇa hare kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇa hare hare ||iti ṣoḍaśakaṃ nāmnāṃ kalikalmaṣanāśanam |nātaḥ parataropāyaḥ sarvavedeṣu dṛśyate ||ṣoḍaśakalā’’vṛtasya jīvasyāvaraṇavināśanam | tataḥ prakāśate paraṃ brahma meghāpāye raviraśmimaṇḍalīveti ||
भावार्थ नारद ने फिर पूछा: "वह नाम क्या है?" हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) ने सोलह नाम बताए: "हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे"। शब्दार्थ: "हरे" हरि का संबोधन रूप है, जो विष्णु का नाम है, "हरने वाला"; "राम" श्रीराम हैं, "जो आनंद देते हैं"; "कृष्ण" श्रीकृष्ण हैं। पाठ कहता है कि सोलह नामों का यह समूह कलियुग के मैल को नष्ट करता है, और सब वेदों में इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं दिखता। पाठ यह भी कहता है कि ये नाम सोलह कलाओं से ढके जीव का आवरण हटाते हैं, और तब परब्रह्म वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे बादल हटने पर सूर्य की किरणों का मंडल चमकता है।
English meaning Narada asked again: "What is that name?" Hiranyagarbha (Brahma) answered with the sixteen names: "hare rāma hare rāma rāma rāma hare hare, hare kṛṣṇa hare kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇa hare hare". Word by word: hare is the calling form of Hari, a name of Vishnu, "the one who takes away"; rāma is Rama, "the one who delights"; kṛṣṇa is Krishna. The text says that this group of sixteen names destroys the stain of the Kali age, and that no better means is seen in all the Vedas. It says that the names remove the covering of the soul, which is wrapped in sixteen parts, and that then the supreme Brahman shines out, as the ring of the sun's rays shines when the clouds move away.
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- नारदः nāradaḥ · नारद (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: nārada, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 537, स्तंभ 2
- पुनः punaḥ · फिर (अव्यय) शब्दकोश: punar, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 633, स्तंभ 2
again, once more
- पप्रच्छ papraccha · पूछा (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: prach, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 658, स्तंभ 1
to ask, question, interrogate
- तत् tat · वह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- नाम nāma · नाम (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: nāman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 2
name, appellation
- किम् kim · क्या? (प्रश्नवाचक सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: kim, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 282, स्तंभ 2
what? how? whence? wherefore? why?
- इति iti · इस प्रकार (उद्धरण का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- सः saḥ · वे (सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- ह ha · निश्चय ही (प्राचीन गद्य का अव्यय) (अव्यय) शब्दकोश: 3. ha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1286, स्तंभ 1
indeed, assuredly, verily, of course, then &c.
- उवाच uvāca · बोले (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: vac, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 912, स्तंभ 1
to speak, say, tell, utter, announce, declare
- हिरण्यगर्भः hiraṇyagarbhaḥ · हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: hiraṇya-garbha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1299, स्तंभ 3
a golden fetus
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- राम rāma · हे राम, आनंद देने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: rāma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 877, स्तंभ 1
pleasing, pleasant, charming, lovely, beautiful
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- राम rāma · हे राम, आनंद देने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: rāma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 877, स्तंभ 1
pleasing, pleasant, charming, lovely, beautiful
- राम rāma · हे राम, आनंद देने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: rāma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 877, स्तंभ 1
pleasing, pleasant, charming, lovely, beautiful
- राम rāma · हे राम, आनंद देने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: rāma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 877, स्तंभ 1
pleasing, pleasant, charming, lovely, beautiful
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- कृष्ण kṛṣṇa · हे कृष्ण (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 1. kṛṣṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 306, स्तंभ 2
N. of a celebrated Avatār of the god Vishṇu
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- कृष्ण kṛṣṇa · हे कृष्ण (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 1. kṛṣṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 306, स्तंभ 2
N. of a celebrated Avatār of the god Vishṇu
- कृष्ण kṛṣṇa · हे कृष्ण (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 1. kṛṣṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 306, स्तंभ 2
N. of a celebrated Avatār of the god Vishṇu
- कृष्ण kṛṣṇa · हे कृष्ण (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 1. kṛṣṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 306, स्तंभ 2
N. of a celebrated Avatār of the god Vishṇu
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- हरे hare · हे हरि (विष्णु), हरने वाले (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. hari, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1289, स्तंभ 3
(esp.) N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- इति iti · इस प्रकार (उद्धरण का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- षोडशकम् ṣoḍaśakam · सोलह का समूह (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: ṣoḍaśaka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1110, स्तंभ 2
consisting of 16
- नाम्नाम् nāmnām · नामों का (षष्ठी बहुवचन) शब्दकोश: nāman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 2
name, appellation
- कलिकल्मषनाशनम् kalikalmaṣanāśanam · कलियुग के मैल का नाश करने वाला (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: kali, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 261, स्तंभ 3
N. of the last and worst of the four Yugas or ages
; kalmaṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 263, स्तंभ 1moral stain, sin
; nāśana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 538, स्तंभ 1destroying &c.
- न na · नहीं (अव्यय) शब्दकोश: 2. na, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 523, स्तंभ 1
not, no, nor, neither
- अतः ataḥ · इससे (अव्यय) शब्दकोश: atas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 12, स्तंभ 1
from this, than this; hence
- परतरोपायः parataropāyaḥ · बढ़कर साधन (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: para-tara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 586, स्तंभ 3
superl. and compar. of para
; upāya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 215, स्तंभ 2that by which one reaches one's aim, a means or expedient (of any kind)
- सर्ववेदेषु sarvavedeṣu · सब वेदों में (समास, सप्तमी बहुवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; 1. veda, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1015, स्तंभ 1knowledge, true or sacred knowledge or lore, knowledge of ritual
- दृश्यते dṛśyate · दिखता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. dṛś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 491, स्तंभ 2
to be seen, become visible, appear
- षोडशकलाऽऽवृतस्य ṣoḍaśakalā’’vṛtasya · सोलह कलाओं से ढके (समास, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: ṣoḍaśa-kala, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1110, स्तंभ 2
having 16 parts, sixteenfold
; kalā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 261, स्तंभ 1any single part or portion of a whole, esp. a sixteenth part
; ā-vṛta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 156, स्तंभ 1covered, concealed, hid
- जीवस्य jīvasya · जीव का (षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: jīva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 422, स्तंभ 2
the principle of life, vital breath, the living or personal soul
- आवरणविनाशनम् āvaraṇavināśanam · आवरण का नाश करने वाला (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: ā-varaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 156, स्तंभ 1
the act of covering, concealing, hiding
; vi-nāśana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 969, स्तंभ 3causing to disappear, removal, destruction, annihilation
- ततः tataḥ · तब (अव्यय) शब्दकोश: tatas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 432, स्तंभ 2
thereupon, then, after that, afterwards
- प्रकाशते prakāśate · प्रकाशित होता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: pra-kāś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 653, स्तंभ 1
to become visible, appear, shine, become evident or manifest
- परम् param · परम (विशेषण (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. para, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 586, स्तंभ 1
highest, supreme, chief
- ब्रह्म brahma · ब्रह्म (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: brahman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 738, स्तंभ 1
one self-existent impersonal Spirit, the one universal Soul
- मेघापाये meghāpāye · बादल हटने पर (समास, सप्तमी एकवचन) शब्दकोश: megha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 831, स्तंभ 2
‘sprinkler,’ a cloud
; apāya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 56, स्तंभ 2going away, departure
- रविरश्मिमण्डली raviraśmimaṇḍalī · सूर्य की किरणों का मंडल (समास (स्त्रीलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: ravi, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 869, स्तंभ 1
the sun (in general) or the sun-god
; raśmi-maṇḍala, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 869, स्तंभ 2a circle or garland of rays
; maṇḍala, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 775, स्तंभ 3a disk (esp. of the sun or moon)
- इव iva · जैसे (अव्यय) शब्दकोश: iva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 168, स्तंभ 3
like, in the same manner as
- इति iti · इस प्रकार (अंश का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
2 छपाइयों में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- शब्द 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: … हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥ १ ॥ इति षोडशकं नाम्नां … ॥ १ ॥ इति षोडशकलावृतस्य जीवस्यावरणविनाशनम् । वही सोलह नाम, उसी क्रम में। 1925 की छपाई 'षोडशकलावृतस्य' से पहले 'इति' जोड़ती है और इसे बिना अवग्रह चिह्न के लिखती है (1923 की छपाई में दो हैं: 'षोडशकलाऽऽवृतस्य')।
- श्लोक-विभाजन एक डिजिटल प्रति में पाठ है बंगाल के गौड़ीय वैष्णवों द्वारा जपा जाने वाला क्रम, जैसा केनेडी 1925 में छापते हैं (पृष्ठ 201, स्कैन पन्ना n227): वही दो पंक्तियाँ, कृष्ण वाली पंक्ति पहले।
श्लोक 3
पुनर्नारदः पप्रच्छ भगवन् कोऽस्य विधिरिति । तं होवाच नास्य विधिरिति ।सर्वदा शुचिरशुचिर्वा पठन् ब्राह्मणः सलोकतां समीपतां सरूपतां सायुज्यतामेति ।यदाऽस्य षोडशीकस्य सार्धत्रिकोटीर्जपति तदा ब्रह्महत्यां तरति । तरति वीरहत्याम् ।स्वर्णस्तेयात् पूतो भवति । वृषलीगमनात् पूतो भवति । पितृदेवमनुष्याणामपकारात् पूतो भवति ।सर्वधर्मपरित्यागपापात् सद्यः शुचितामाप्नुयात् । सद्यो मुच्यते सद्यो मुच्यते इत्युपनिषत् ॥
Punarnaradah paprachchha bhagavan kosya vidhiriti, tam hovacha nasya vidhiritiSarvada shuchirashuchirva pathan brahmanah salokatam samipatam sarupatam sayujyatametiYadasya shodashikasya sardhatrikotirjapati tada brahmahatyam tarati, tarati virahatyamSvarnasteyat puto bhavati, vrishaligamanat puto bhavati, pitridevamanushyanamapakarat puto bhavatiSarvadharmaparityagapapat sadyah shuchitamapnuyat, sadyo muchyate sadyo muchyate ityupanishat
IAST
punarnāradaḥ papraccha bhagavan ko’sya vidhiriti | taṃ hovāca nāsya vidhiriti |sarvadā śuciraśucirvā paṭhan brāhmaṇaḥ salokatāṃ samīpatāṃ sarūpatāṃ sāyujyatāmeti |yadā’sya ṣoḍaśīkasya sārdhatrikoṭīrjapati tadā brahmahatyāṃ tarati | tarati vīrahatyām |svarṇasteyāt pūto bhavati | vṛṣalīgamanāt pūto bhavati | pitṛdevamanuṣyāṇāmapakārāt pūto bhavati |sarvadharmaparityāgapāpāt sadyaḥ śucitāmāpnuyāt | sadyo mucyate sadyo mucyate ityupaniṣat ||
भावार्थ नारद ने फिर पूछा: "भगवन्, इसकी विधि क्या है?" ब्रह्मा ने कहा कि इसकी कोई विधि नहीं है। पाठ कहता है कि जो ब्राह्मण हर समय, शुद्ध हो या अशुद्ध, इसका पाठ करता है, वह चार गतियाँ पाता है: भगवान का लोक, भगवान की निकटता, भगवान जैसा रूप और भगवान से एकता। पाठ कहता है कि जो इन सोलह नामों का साढ़े तीन करोड़ बार जप करता है, वह ब्रह्महत्या और वीरहत्या के पाप से पार हो जाता है; सोने की चोरी, वृषली-गमन (पुराने धर्मशास्त्रों में वैदिक व्यवस्था से बाहर मानी गई स्त्री से संबंध) और पितरों, देवताओं और मनुष्यों के प्रति किए अपकार से शुद्ध हो जाता है; और सब धर्मों को छोड़ने के दोष से तुरंत शुद्ध हो जाता है। "वह तुरंत मुक्त होता है, तुरंत मुक्त होता है। ऐसा उपनिषद् कहता है।" 1925 की बंबई की छपाई में वृषली वाला वाक्य नहीं है।
English meaning Narada asked again: "Lord, what is the rule for it?" Brahma said that it has no rule. The text says that a brāhmaṇa who recites it at all times, pure or impure, reaches the four goals: the same world as God, nearness to God, a form like God's, and union with God. It says that one who repeats these sixteen names three and a half crore times (35 million) crosses over the sin of killing a brāhmaṇa and of killing a hero; is made pure after stealing gold, after relations with a vṛṣalī (a woman whom the old law books place outside the Vedic order), and after wrongs done to ancestors, gods and people; and becomes pure at once from the fault of giving up every duty. "One is freed at once, freed at once. So says the Upanishad." The 1925 Bombay printing does not have the sentence about the vṛṣalī.
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- पुनः punaḥ · फिर (अव्यय) शब्दकोश: punar, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 633, स्तंभ 2
again, once more
- नारदः nāradaḥ · नारद (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: nārada, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 537, स्तंभ 2
- पप्रच्छ papraccha · पूछा (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: prach, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 658, स्तंभ 1
to ask, question, interrogate
- भगवन् bhagavan · हे भगवन् (संबोधन एकवचन) शब्दकोश: 2. bhagavat, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 743, स्तंभ 3
glorious, illustrious, divine, adorable, venerable
- कः kaḥ · क्या? (प्रश्नवाचक सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. ka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 240, स्तंभ 2
who? which? what?
- अस्य asya · इसकी (सर्वनाम, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: 1. idam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 2
this, this here, referring to something near the speaker
- विधिः vidhiḥ · विधि, नियम (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. vidhi, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 968, स्तंभ 1
a rule, formula, injunction, ordinance, statute, precept, law, direction
- इति iti · इस प्रकार (उद्धरण का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- तम् tam · उनसे (सर्वनाम, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- ह ha · निश्चय ही (प्राचीन गद्य का अव्यय) (अव्यय) शब्दकोश: 3. ha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1286, स्तंभ 1
indeed, assuredly, verily, of course, then &c.
- उवाच uvāca · बोले (लिट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: vac, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 912, स्तंभ 1
to speak, say, tell, utter, announce, declare
- न na · नहीं (अव्यय) शब्दकोश: 2. na, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 523, स्तंभ 1
not, no, nor, neither
- अस्य asya · इसकी (सर्वनाम, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: 1. idam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 2
this, this here, referring to something near the speaker
- विधिः vidhiḥ · विधि, नियम (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. vidhi, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 968, स्तंभ 1
a rule, formula, injunction, ordinance, statute, precept, law, direction
- इति iti · इस प्रकार (उद्धरण का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- सर्वदा sarvadā · हमेशा (अव्यय) शब्दकोश: sarvadā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1189, स्तंभ 2
always, at all times
- शुचिः śuciḥ · शुद्ध (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: śuci, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1081, स्तंभ 1
clear, clean, pure (lit. and fig.), holy, unsullied, undefiled
- अशुचिः aśuciḥ · अशुद्ध (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: a-śuci, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 113, स्तंभ 2
impure, foul
- वा vā · या (अव्यय) शब्दकोश: 1. vā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 934, स्तंभ 2
or
- पठन् paṭhan · पाठ करते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: paṭh, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 580, स्तंभ 1
to read or repeat aloud, to recite, rehearse
- ब्राह्मणः brāhmaṇaḥ · ब्राह्मण (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: brāhmaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 741, स्तंभ 2
one who has divine knowledge (sometimes applied to Agni), a Brāhman
- सलोकताम् salokatām · (ईश्वर के) लोक में होना (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sa-lokatā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1190, स्तंभ 1
the being in the same world or sphere with
- समीपताम् samīpatām · (ईश्वर की) समीपता (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: samīpa-tā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1165, स्तंभ 1
nearness, contiguity, proximity
- सरूपताम् sarūpatām · (ईश्वर के) समान रूप (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sa-rūpa-tā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1183, स्तंभ 2
identity of form, likeness, resemblance to
- सायुज्यताम् sāyujyatām · (ईश्वर से) सायुज्य, एकता (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sāyujya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1207, स्तंभ 3
intimate union, communion with
- एति eti · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 5. i, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 163, स्तंभ 3
to arrive at, reach, obtain
- यदा yadā · जब (अव्यय) शब्दकोश: yadā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 1
when, at what time, whenever
- अस्य asya · इस (सर्वनाम, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: 1. idam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 2
this, this here, referring to something near the speaker
- षोडशीकस्य ṣoḍaśīkasya · सोलह नामों वाले (मंत्र) का (विशेषण, षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: ṣoḍaśin, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1110, स्तंभ 3
consisting of 16, having 16 parts
; ṣoḍaśaka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1110, स्तंभ 2consisting of 16
- सार्धत्रिकोटीः sārdhatrikoṭīḥ · साढ़े तीन करोड़ बार (समास, द्वितीया बहुवचन) शब्दकोश: sārdha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1209, स्तंभ 3
joined with a half, plus one half, increased by one half
; tri, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 457, स्तंभ 3; koṭi, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 312, स्तंभ 3the highest number in the older system of numbers (viz. a Krore or ten millions)
- जपति japati · जप करता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: jap, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 411, स्तंभ 3
to utter in a low voice, whisper, mutter (esp. prayers or incantations)
- तदा tadā · तब (अव्यय) शब्दकोश: tadā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 3
at that time, then, in that case
- ब्रह्महत्याम् brahmahatyām · ब्रह्महत्या (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: brahma-hatyā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 740, स्तंभ 2
murder of a Brāhman (or any crime equally heinous)
- तरति tarati · पार कर जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: tṝ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 454, स्तंभ 2
to pass across or over, cross over (a river)
- तरति tarati · पार कर जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: tṝ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 454, स्तंभ 2
to pass across or over, cross over (a river)
- वीरहत्याम् vīrahatyām · वीरहत्या (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: vīra-hatyā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1006, स्तंभ 2
the killing of a man, murder of a son
- स्वर्णस्तेयात् svarṇasteyāt · सोने की चोरी से (समास, पंचमी एकवचन) शब्दकोश: svarṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1282, स्तंभ 1
gold
; steya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1260, स्तंभ 2theft, robbery, larceny
- पूतः pūtaḥ · शुद्ध (भूतकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. pūta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 640, स्तंभ 3
cleaned, purified, pure, clear, bright
- भवति bhavati · हो जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 760, स्तंभ 2
to become, be
- वृषलीगमनात् vṛṣalīgamanāt · निम्न जाति की स्त्री से संबंध से (समास, पंचमी एकवचन) शब्दकोश: vṛṣalī, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1013, स्तंभ 1
a woman of low caste, Śūdra woman
; gamana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 348, स्तंभ 1going to or approaching
- पूतः pūtaḥ · शुद्ध (भूतकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. pūta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 640, स्तंभ 3
cleaned, purified, pure, clear, bright
- भवति bhavati · हो जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 760, स्तंभ 2
to become, be
- पितृदेवमनुष्याणाम् pitṛdevamanuṣyāṇām · पितरों, देवताओं और मनुष्यों के (समास, षष्ठी बहुवचन) शब्दकोश: pitṛ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 626, स्तंभ 2
the fathers, forefathers, ancestors
; deva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 492, स्तंभ 2a deity, god
; manuṣya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 784, स्तंभ 3a man, human being
- अपकारात् apakārāt · अपकार से (पंचमी एकवचन) शब्दकोश: apa-kāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 48, स्तंभ 1
wrong, offence, injury, hurt
- पूतः pūtaḥ · शुद्ध (भूतकालिक कृदन्त, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. pūta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 640, स्तंभ 3
cleaned, purified, pure, clear, bright
- भवति bhavati · हो जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 760, स्तंभ 2
to become, be
- सर्वधर्मपरित्यागपापात् sarvadharmaparityāgapāpāt · सब धर्मों के त्याग के पाप से (समास, पंचमी एकवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; 1. dharma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 510, स्तंभ 3usage, practice, customary observance or prescribed conduct, duty
; pari-tyāga, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 595, स्तंभ 2the act of leaving, abandoning, deserting, quitting, giving up, neglecting, renouncing
; pāpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 618, स्तंभ 2sin, vice, crime, guilt
- सद्यः sadyaḥ · तुरंत (अव्यय) शब्दकोश: sa-dyas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1140, स्तंभ 1
on the same day, in the very moment
- शुचिताम् śucitām · शुद्धता (संज्ञा (स्त्रीलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: śuci-tā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1081, स्तंभ 2
clearness, purity (lit. and fig.), uprightness, honesty, virtue
- आप्नुयात् āpnuyāt · पाए (विधिलिङ्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. āp, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 142, स्तंभ 1
to obtain, gain, take possession of
- सद्यः sadyaḥ · तुरंत (अव्यय) शब्दकोश: sa-dyas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1140, स्तंभ 1
on the same day, in the very moment
- मुच्यते mucyate · मुक्त होता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 2. muc, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 820, स्तंभ 3
to be loosed, to be set free or released
- सद्यः sadyaḥ · तुरंत (अव्यय) शब्दकोश: sa-dyas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1140, स्तंभ 1
on the same day, in the very moment
- मुच्यते mucyate · मुक्त होता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 2. muc, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 820, स्तंभ 3
to be loosed, to be set free or released
- इति iti · इस प्रकार (पाठ का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- उपनिषत् upaniṣat · उपनिषद् (संज्ञा (स्त्रीलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. upa-niṣad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 201, स्तंभ 1
a class of philosophical writings
5 छपाइयों में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- लोप 1923 के अड्यार, मद्रास मुद्रण में पाठ है: सलोकतां समीपतां सायुज्यतामेति 1923 की छपाई की पादटिप्पणी 1 (पृष्ठ 19): इसकी दो पांडुलिपियों (अ, अ १) में 'सरूपतां' नहीं है।
- शब्द 1923 के अड्यार, मद्रास मुद्रण में पाठ है: सायुज्यमेति पादटिप्पणी 2: पांडुलिपि अ में 'सायुज्यतामेति' की जगह 'सायुज्यमेति' है।
- वर्तनी 1923 के अड्यार, मद्रास मुद्रण में पाठ है: षोडशिकस्य / षोडशकस्य पादटिप्पणी 3: 'षोडशीकस्य' की जगह पांडुलिपियों अ १, अ २, उ १ और क में 'षोडशि…' और पांडुलिपि अ में 'षोडश…' है।
- लोप 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: … यदास्य षोडशीकस्य … स्वर्णस्तेयात्पूतो भवति । पितृदेवमनुष्याणामपकारात्पूतो भवति । … 1925 की छपाई में 'वृषलीगमनात् पूतो भवति' नहीं है; वह 'यदास्य' को बिना अवग्रह के लिखती है, और 'भगवन्कोऽस्य', 'पठन्ब्राह्मणः', 'स्वर्णस्तेयात्पूतो' को जोड़कर लिखती है।
- शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: … सरूपतां सायुज्यमेति । यदास्य षोडशकस्य सार्धत्रिकोटीर्जपति … आज के वेबसाइट वाले पाठ में 'सायुज्यतामेति' की जगह 'सायुज्यमेति' और 'षोडशीकस्य' की जगह 'षोडशकस्य' है, यानी वे पाठ जो 1923 की पादटिप्पणियाँ उसकी पांडुलिपि अ से बताती हैं। 1923 और 1925 की दोनों छपाइयों में पाठ वैसा ही है जैसा दिखाया गया है, इसलिए उनके शब्द रखे गए हैं। संस्कृत विकिस्रोत का पृष्ठ इसी वेबसाइट वाले पाठ की प्रति है।
संस्कृत पाठ: 1923 का अड्यार मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव
हरे कृष्ण महामंत्र के बारे में
हमने जो दो छपाइयाँ पढ़ीं (मद्रास, 1923 और बंबई, 1925), उन दोनों में उपनिषद् "हरे राम" से शुरू होता है: "हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे"। बंगाल के गौड़ीय वैष्णव, जो चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी हैं, यही सोलह नाम "हरे कृष्ण" से शुरू करके गाते हैं; 1925 में छपे एक अध्ययन में यही क्रम दर्ज है और कहा गया है कि चैतन्य स्वयं इसी का जप करते थे। दोनों में वही सोलह नाम हैं। इस पृष्ठ पर वह क्रम है जो उपनिषद् में छपा है, और दूसरे क्रम का नाम दिया गया है।
इस पृष्ठ पर पूरा उपनिषद् तीन छोटे अंशों में है। पहला बताता है कि नाम क्यों बताए गए, दूसरा नाम देता है, और तीसरा नियमों के प्रश्न का उत्तर देता है। उपनिषद् कहता है कि इसका कोई नियम नहीं है, और जप के बड़े फल बताता है। ये फल पाठ के अपने शब्द हैं और ऐसे ही दिखाए गए हैं।
व्याख्याएँ अलग-अलग हैं। 1923 की छपाई के साथ छपी टीका के लेखक उपनिषद्-ब्रह्म-योगी (अद्वैत आचार्य) हरि, राम और कृष्ण को एक ही ब्रह्म के नाम मानते हैं, और तीसरे अंश को ऐसे पढ़ते हैं कि वैदिक पाठ द्विजों के लिए है और बाकी सब लोग नाम-स्मरण कर सकते हैं। केनेडी के 1925 के विवरण के अनुसार गौड़ीय आचार्य यह जप सबके लिए खुला रखते हैं, बिना किसी विधि के। हर व्याख्या अपने संप्रदाय के नाम के साथ अंश के नीचे दी गई है।
उच्चारण कैसे करें
हर नाम पूरा बोला जाता है: ह-रे, रा-म, कृ-ष्ण। "हरे" संबोधन का रूप है (भगवान को पुकारना)। हिंदी बोलचाल में राम और कृष्ण का अंतिम "अ" प्रायः नहीं बोला जाता, पर जप में आम तौर पर बोला जाता है, ताकि हर पंक्ति में आठ शब्द और सोलह अक्षर हों। IAST पंक्ति में हर स्वर वैसे ही लिखा है जैसे वर्तनी में है।
वे पर्व, जिनकी मार्गदर्शिका में इस प्रार्थना का नाम है
विष्णु, राम और कृष्ण की और प्रार्थनाएँ
संबंधित
परिवारों के प्रश्न
हरे कृष्ण महामंत्र किसने लिखी?
कलिसंतरण उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद) से; रचयिता अज्ञात।
यह पृष्ठ कौन-सा पाठ मानता है?
संस्कृत पाठ: 1923 का अड्यार मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत देखें
स्रोत और लाइसेंस
- पाठ
- The Vaishnava-Upanishads with the commentary of Sri Upanishad-Brahma-Yogin (वैष्णव-उपनिषदः), edited by A. Mahadeva Sastri (A. Mahadeva Sastri (Alladi Mahadeva Sastri), Upanishad-Brahma-Yogin (Upaniṣad-brahma-yogin, also called Upaniṣad-brahmendra), The Adyar Library (Theosophical Society), Adyar, Madras, 1923). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। इन पृष्ठों का संस्कृत पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखी और उद्धृत संस्करण से मिलाई गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
- जाँच
- उद्धृत संस्करण से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।