ॐ नमो नारायणाय (अर्थ सहित)
नारायण उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद) से; रचयिता अज्ञात
ॐ नमो नारायणाय (Om Namo Narayanaya): ॐ नमो नारायणाय ("ॐ, नारायण को नमन") भगवान विष्णु के नारायण रूप का आठ अक्षरों वाला मंत्र (अष्टाक्षर) है। इसका लिखित स्रोत नारायण उपनिषद् है, जो कृष्ण यजुर्वेद का एक छोटा उपनिषद् है। उस उपनिषद् का तीसरा खंड मंत्र को शब्द-शब्द बनाता है: पहले "ॐ", फिर "नमः", फिर "नारायणाय"। वह अक्षर गिनता है, एक, दो और पाँच, और पूरे को "नारायण का अष्टाक्षर पद" कहता है।
पाठ और शब्दार्थ
दिखावट
दिखावट
ये चुनाव इसी ब्राउज़र में रहते हैं।
श्लोक 3
ओमित्यग्रे व्याहरेत् । नम इति पश्चात् । नारायणायेत्युपरिष्टात् ।ओमित्येकाक्षरम् । नम इति द्वे अक्षरे । नारायणायेति पञ्चाक्षराणि ।एतद्वै नारायणस्याष्टाक्षरं पदम् ।यो ह वै नारायणस्याष्टाक्षरं पदमध्येति अनपब्रुवः सर्वमायुरेति विन्दते प्राजापत्यं रायस्पोषं गौपत्यं ततोऽमृतत्वमश्नुते ततोऽमृतत्वमश्नुत इति ।एतत्सामवेदशिरोऽधीते ॥
Omityagre vyaharet, nama iti pashchat, narayanayetyuparishtatOmityekaksharam, nama iti dve akshare, narayanayeti panchaksharaniEtadvai narayanasyashtaksharam padamYo ha vai narayanasyashtaksharam padamadhyeti anapabruvah sarvamayureti vindate prajapatyam rayasposham gaupatyam tatomritatvamashnute tatomritatvamashnuta itiEtatsamavedashirodhite
IAST
omityagre vyāharet | nama iti paścāt | nārāyaṇāyetyupariṣṭāt |omityekākṣaram | nama iti dve akṣare | nārāyaṇāyeti pañcākṣarāṇi |etadvai nārāyaṇasyāṣṭākṣaraṃ padam |yo ha vai nārāyaṇasyāṣṭākṣaraṃ padamadhyeti anapabruvaḥ sarvamāyureti vindate prājāpatyaṃ rāyaspoṣaṃ gaupatyaṃ tato’mṛtatvamaśnute tato’mṛtatvamaśnuta iti |etatsāmavedaśiro’dhīte ||
भावार्थ मंत्र शब्द-शब्द बनाया गया है: पहले "ॐ" बोलें, उसके बाद "नमः" (नमन), और अंत में "नारायणाय" (नारायण को)। ॐ एक अक्षर है, नमः दो, नारायणाय पाँच: यही नारायण का अष्टाक्षर पद है। पाठ कहता है कि जो इस अष्टाक्षर पद का अध्ययन करता है, वह निंदा से मुक्त रहता है, पूरी आयु पाता है, प्राणियों पर प्रभुत्व, धन की वृद्धि और गायों का स्वामित्व पाता है, और उसके बाद अमृतत्व पाता है। अंतिम पंक्ति इस खंड को "सामवेद का शिर" कहती है।
English meaning The mantra is built word by word: say "Om" first, "namaḥ" (bowing) after it, and "nārāyaṇāya" (to Narayana) at the end. Om is one syllable, namaḥ two, nārāyaṇāya five: this is the eight-syllable word of Narayana. The text says that whoever studies this eight-syllable word goes free of blame, lives a full life, and gains lordship over beings, growth of wealth and lordship over cattle, and after that reaches immortality. The last line names this part "the head of the Sama Veda".
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- ओम् om · ॐ, पवित्र अक्षर (अव्यय) शब्दकोश: om, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 235, स्तंभ 3
a word of solemn affirmation and respectful assent
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- अग्रे agre · पहले, आरंभ में (अव्यय) शब्दकोश: agra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 6, स्तंभ 2
in front, ahead of, in the beginning, first
- व्याहरेत् vyāharet · बोलना चाहिए (विधिलिङ्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: vy-ā-hṛ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1039, स्तंभ 3
to utter or pronounce a sound, speak, say to
- नमः namaḥ · नमन, प्रणाम (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: namas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 528, स्तंभ 1
bow, obeisance, reverential salutation, adoration
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- पश्चात् paścāt · उसके बाद (अव्यय) शब्दकोश: paścāt, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 612, स्तंभ 2
afterwards, hereafter, later, at last
- नारायणाय nārāyaṇāya · नारायण को (चतुर्थी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- उपरिष्टात् upariṣṭāt · बाद में, अंत में (अव्यय) शब्दकोश: upariṣṭāt, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 205, स्तंभ 2
afterwards
- ओम् om · ॐ, पवित्र अक्षर (अव्यय) शब्दकोश: om, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 235, स्तंभ 3
a word of solemn affirmation and respectful assent
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- एकाक्षरम् ekākṣaram · एक अक्षर (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: ekākṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 229, स्तंभ 3
a single syllable
- नमः namaḥ · नमन, प्रणाम (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: namas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 528, स्तंभ 1
bow, obeisance, reverential salutation, adoration
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- द्वे dve · दो (संख्यावाचक (नपुंसकलिंग), प्रथमा द्विवचन) शब्दकोश: dvi, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 504, स्तंभ 3
du. two
- अक्षरे akṣare · अक्षर (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा द्विवचन) शब्दकोश: a-kṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 3, स्तंभ 2
a syllable; the syllable om
- नारायणाय nārāyaṇāya · नारायण को (चतुर्थी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- पञ्चाक्षराणि pañcākṣarāṇi · पाँच अक्षर (समास (नपुंसकलिंग), प्रथमा बहुवचन) शब्दकोश: pañcākṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 577, स्तंभ 3
consisting of 5 syllables
; a-kṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 3, स्तंभ 2a syllable; the syllable om
- एतत् etat · यह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: etad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 2
this, this here, here
- वै vai · निश्चय ही (बल देने वाला शब्द) (अव्यय) शब्दकोश: 2. vai, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1019, स्तंभ 3
a particle of emphasis and affirmation, generally placed after a word
- नारायणस्य nārāyaṇasya · नारायण का (षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- अष्टाक्षरम् aṣṭākṣaram · आठ अक्षरों वाला (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: aṣṭākṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 117, स्तंभ 1
containing eight syllables
- पदम् padam · पद, शब्द (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: pada, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 583, स्तंभ 1
a word or an inflected word
- यः yaḥ · जो (संबंधवाचक सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- ह ha · निश्चय ही (प्राचीन गद्य का अव्यय) (अव्यय) शब्दकोश: 3. ha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1286, स्तंभ 1
indeed, assuredly, verily, of course, then &c.
- वै vai · निश्चय ही (बल देने वाला शब्द) (अव्यय) शब्दकोश: 2. vai, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1019, स्तंभ 3
a particle of emphasis and affirmation, generally placed after a word
- नारायणस्य nārāyaṇasya · नारायण का (षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- अष्टाक्षरम् aṣṭākṣaram · आठ अक्षरों वाले (विशेषण, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: aṣṭākṣara, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 117, स्तंभ 1
containing eight syllables
- पदम् padam · पद को (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: pada, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 583, स्तंभ 1
a word or an inflected word
- अध्येति adhyeti · अध्ययन करता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: adhī, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
to go over, study
- अनपब्रुवः anapabruvaḥ · निंदा न करने वाला; निर्दोष (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 3. a, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1, स्तंभ 1
having a negative or privative or contrary sense
; apa-brū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 50, स्तंभ 1to speak some mysterious or evil words upon
- सर्वम् sarvam · पूरी (विशेषण (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
- आयुः āyuḥ · आयु (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: āyus, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 149, स्तंभ 1
life, vital power, vigour, health, duration of life, long life
- एति eti · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 5. i, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 163, स्तंभ 3
to arrive at, reach, obtain
- विन्दते vindate · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: 3. vid, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 964, स्तंभ 3
to find, discover, meet or fall in with, obtain, get, acquire
- प्राजापत्यम् prājāpatyam · प्रजापति का (वरदान): संतान, या उनका लोक (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: prājāpatya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 703, स्तंभ 3
generative energy, procreative power
; prājāpatya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 703, स्तंभ 3the world of Prajā-pati
- रायस्पोषम् rāyaspoṣam · धन की वृद्धि (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: rāyas-poṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 888, स्तंभ 1
increase of property or wealth or prosperity
- गौपत्यम् gaupatyam · गायों का स्वामित्व (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: gaupatya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 369, स्तंभ 3
the possession of cattle
- ततः tataḥ · उसके बाद (अव्यय) शब्दकोश: tatas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 432, स्तंभ 2
thereupon, then, after that, afterwards
- अमृतत्वम् amṛtatvam · अमृतत्व (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: a-mṛta-tva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 82, स्तंभ 2; a-mṛta-tā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 82, स्तंभ 2
immortality
- अश्नुते aśnute · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: 1. aś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 112, स्तंभ 2
to reach, come to, arrive at, get, gain, obtain
- ततः tataḥ · उसके बाद (अव्यय) शब्दकोश: tatas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 432, स्तंभ 2
thereupon, then, after that, afterwards
- अमृतत्वम् amṛtatvam · अमृतत्व (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: a-mṛta-tva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 82, स्तंभ 2; a-mṛta-tā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 82, स्तंभ 2
immortality
- अश्नुते aśnute · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: 1. aś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 112, स्तंभ 2
to reach, come to, arrive at, get, gain, obtain
- इति iti · इस प्रकार (अंश का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- एतत् etat · यह (अंश) (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: etad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 2
this, this here, here
- सामवेदशिरः sāmavedaśiraḥ · सामवेद का शिर (समास (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sāma-veda, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1205, स्तंभ 2
‘Veda of chants,’ N. of one of the three principal Vedas
; śiras, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1072, स्तंभ 2the upper end or highest part of anything, top, peak, summit
- अधीते adhīte · अध्ययन करता है, पाठ करता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: adhī, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
to study, learn by heart, read, recite
3 छपाइयों में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- छपे संस्करण में पाठ है: ॐमित्यग्रे व्याहरेत् । नम इति पश्चात् । नारायणायेत्युपरिष्टात् ।
ॐमित्येकाक्षरम् । नम इति द्वे अक्षरे । नारायणायेति पञ्चाक्षराणि ।
एतद्वै नारायणास्याष्टाक्षरं पदम् ।
यो ह वै नारायणस्याष्टाक्षरं पदमध्येति अनपब्रुवः सर्वमायुरेति विन्दते प्राजापत्यं रायस्पोषं गौपत्यं ततोऽमृतत्वमश्नुते ततोऽमृतत्वमश्नुत इति ।
एतत्सामवेदशिरोऽधीते ॥ The printing writes the Om sign before 'मि' ('ॐमित्यग्रे', 'ॐमित्येकाक्षरम्'), a common way of printing 'ओम् + इति'; it is spelled out as 'ओमित्यग्रे', 'ओमित्येकाक्षरम्' so that the words can be read and transliterated. The 1925 printing prints the same Om sign. Spelling, not wording: the gate folds it (decision 14 addendum e). 'नारायणास्याष्टाक्षरं' (a long ā after ण) breaks the grammar; the display has 'नारायणस्याष्टाक्षरं', as the same passage prints in the next sentence and the 1925 printing prints both times. Same rule as the Gita printing flaws (GOAL.md, 12 Oct 2026). - विराम-चिह्न 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: … एतद्वै नारायणस्याष्टाक्षरं पदम् । … पदमध्येति । अनपब्रुवः सर्वमायुरेति । विन्दते … 1925 की छपाई में दोनों बार 'नारायणस्याष्टाक्षरं' है, और 'पदमध्येति' तथा 'सर्वमायुरेति' के बाद दंड लगे हैं।
- शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: ओमित्यग्रे व्याहरेत् । नमो इति पश्चात् । … ओमित्येकाक्षरम् । नमो इति द्वे अक्षरे । … अनपब्रुवस्सर्वमायुरेति । … ततोऽमृतत्वमश्नुत इति । य एवं वेद ॥ आज का पाठ-ग्रंथ 'नम इति' की जगह 'नमो इति' पढ़ता है (दो बार) और अंत में 'य एवं वेद' जोड़ता है; वह इस भाग के बाद 'एतत्सामवेदशिरोऽधीते' को कोष्ठक में रखता है। 1923 और 1925 की छपाइयों में पाठ वैसा ही है जैसा दिखाया गया है।
श्लोक 4
प्रत्यगानन्दं ब्रह्म पुरुषं प्रणवस्वरूपम् । अकार उकारो मकार इति ।तानेकधा समभवत्तदेतदोमिति यमुक्त्वा मुच्यते योगी जन्मसंसारबन्धनात् ।ॐ नमो नारायणायेति मन्त्रोपासको वैकुण्ठभवनं गमिष्यति ।तदिदं पुण्डरीकं विज्ञानघनं तस्मात्तटिदाभमात्रम् ।ब्रह्मण्यो देवकीपुत्रो ब्रह्मण्यो मधुसूदनः ।ब्रह्मण्यः पुण्डरीकाक्षो ब्रह्मण्यो विष्णुरच्युत इति ।सर्वभूतस्थमेकं वै नारायणं कारणपुरुषमकारणं परं ब्रह्मोम् ।एतदथर्वशिरोऽधीते ॥
Pratyaganandam brahma purusham pranavasvarupam, akara ukaro makara itiTanekadha samabhavattadetadomiti yamuktva muchyate yogi janmasansarabandhanatOm namo narayanayeti mantropasako vaikunthabhavanam gamishyatiTadidam pundarikam vijnanaghanam tasmattatidabhamatramBrahmanyo devakiputro brahmanyo madhusudanahBrahmanyah pundarikaksho brahmanyo vishnurachyuta itiSarvabhutasthamekam vai narayanam karanapurushamakaranam param brahmomEtadatharvashirodhite
IAST
pratyagānandaṃ brahma puruṣaṃ praṇavasvarūpam | akāra ukāro makāra iti |tānekadhā samabhavattadetadomiti yamuktvā mucyate yogī janmasaṃsārabandhanāt |oṃ namo nārāyaṇāyeti mantropāsako vaikuṇṭhabhavanaṃ gamiṣyati |tadidaṃ puṇḍarīkaṃ vijñānaghanaṃ tasmāttaṭidābhamātram |brahmaṇyo devakīputro brahmaṇyo madhusūdanaḥ |brahmaṇyaḥ puṇḍarīkākṣo brahmaṇyo viṣṇuracyuta iti |sarvabhūtasthamekaṃ vai nārāyaṇaṃ kāraṇapuruṣamakāraṇaṃ paraṃ brahmom |etadatharvaśiro’dhīte ||
भावार्थ अंतरात्मा का आनंद, पुरुष, ब्रह्म, ॐ के रूप वाला है। उसकी ध्वनियाँ अ, उ और म हैं; ये एक होकर ॐ बनीं। जो योगी इसे बोलता है, वह जन्म और संसार के बंधन से छूट जाता है। पाठ कहता है कि जो "ॐ नमो नारायणाय" मंत्र से उपासना करता है, वह वैकुंठ धाम को जाएगा। वह धाम (हृदय का) कमल है, ज्ञान से भरा, बिजली की तरह चमकता हुआ। देवकी-पुत्र ब्रह्मनिष्ठों के प्रिय हैं; मधुसूदन उनके प्रिय हैं; कमल-नयन (पुण्डरीकाक्ष) उनके प्रिय हैं; अच्युत विष्णु उनके प्रिय हैं। सब प्राणियों में स्थित एक नारायण कारण हैं, पुरुष हैं, स्वयं बिना कारण के हैं: परब्रह्म, ॐ। अंतिम पंक्ति इस खंड को "अथर्ववेद का शिर" कहती है।
English meaning Brahman, the bliss within, the Person, has the form of Om. Its sounds are a, u and m; these came together as one, and that is Om. The yogi who says it is freed from the bonds of birth and worldly life. The text says that one who worships with the mantra "Om namo nārāyaṇāya" will go to the abode of Vaikuntha. That abode is the lotus (of the heart), full of knowledge, shining like lightning. The Son of Devaki is dear to the Vedic seers; Madhusudana is dear to them; the lotus-eyed one (Pundarikaksha) is dear to them; Vishnu, the Unfallen (Achyuta), is dear to them. The one Narayana, present in all beings, is the cause and the Person, himself without cause: the supreme Brahman, Om. The last line names this part "the head of the Atharva Veda".
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- प्रत्यगानन्दम् pratyagānandam · भीतर का आनंद (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: pratyag-ānanda, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 675, स्तंभ 2
inwardly rejoicing, appearing as inward delight
- ब्रह्म brahma · ब्रह्म (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: brahman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 738, स्तंभ 1
one self-existent impersonal Spirit, the one universal Soul
- पुरुषम् puruṣam · पुरुष, परम पुरुष (द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: puruṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 637, स्तंभ 1
the Supreme Being or Soul of the universe
- प्रणवस्वरूपम् praṇavasvarūpam · ॐ के स्वरूप वाला (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: pra-ṇava, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 660, स्तंभ 3
the mystical or sacred syllable Om
; sva-rūpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1276, स्तंभ 2o° own form or shape
- अकारः akāraḥ · अ की ध्वनि (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: a-kāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1, स्तंभ 1
the letter or sound a
- उकारः ukāraḥ · उ की ध्वनि (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: u-kāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 171, स्तंभ 3
the letter or sound u
- मकारः makāraḥ · म की ध्वनि (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. ma-kāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 771, स्तंभ 1
the letter or sound ma
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- तान् tān · ये (ध्वनियाँ) (सर्वनाम, द्वितीया बहुवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- एकधा ekadhā · एक होकर (अव्यय) शब्दकोश: ekadhā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 1
in one way, together, at once
- समभवत् samabhavat · एक हुए, मिले (लङ्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: sam-bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1178, स्तंभ 3
to be or come together, assemble, meet, be joined or united with
- तत् tat · वह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- एतत् etat · यह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: etad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 2
this, this here, here
- ओम् om · ॐ, पवित्र अक्षर (अव्यय) शब्दकोश: om, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 235, स्तंभ 3
a word of solemn affirmation and respectful assent
- इति iti · (शब्द) यह, ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- यम् yam · जिसे (संबंधवाचक सर्वनाम, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- उक्त्वा uktvā · बोलकर (पूर्वकालिक कृदन्त) शब्दकोश: vac, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 912, स्तंभ 1
to speak, say, tell, utter, announce, declare
- मुच्यते mucyate · मुक्त होता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 2. muc, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 820, स्तंभ 3
to be loosed, to be set free or released
- योगी yogī · योगी (प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yogin, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 857, स्तंभ 3
a follower of the Yoga system, a Yogin (usually called Yogī) or contemplative saint
- जन्मसंसारबन्धनात् janmasaṃsārabandhanāt · जन्म और संसार के बंधन से (समास, पंचमी एकवचन) शब्दकोश: janman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 411, स्तंभ 3
birth, production
; saṃ-sāra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1119, स्तंभ 3transmigration, metempsychosis, the world, secular life, worldly illusion
; bandhana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 721, स्तंभ 1a bond, tie (also fig.), rope, cord, tether
- ॐ oṃ · ॐ (अव्यय) शब्दकोश: om, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 235, स्तंभ 3
a word of solemn affirmation and respectful assent
- नमः namaḥ · नमन, प्रणाम (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: namas, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 528, स्तंभ 1
bow, obeisance, reverential salutation, adoration
- नारायणाय nārāyaṇāya · नारायण को (चतुर्थी एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- इति iti · इस प्रकार (मंत्र का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- मन्त्रोपासकः mantropāsakaḥ · मंत्र से उपासना करने वाला (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: mantra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 786, स्तंभ 1
a sacred formula addressed to any individual deity (e.g. Om Śivāya namaḥ)
; upāsaka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 215, स्तंभ 1worshipping, a worshipper, follower
- वैकुण्ठभवनम् vaikuṇṭhabhavanam · वैकुंठ धाम (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: vaikuṇṭha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1020, स्तंभ 2
Vishṇu's heaven
; bhavana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 749, स्तंभ 2a place of abode, mansion, home, house, palace, dwelling
- गमिष्यति gamiṣyati · जाएगा (लृट्, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. gam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 347, स्तंभ 1
to go, move, go away, set out, come
- तत् tat · वह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- इदम् idam · यह (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. idam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 2
this, this here, referring to something near the speaker
- पुण्डरीकम् puṇḍarīkam · कमल (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: puṇḍarīka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 631, स्तंभ 3
a lotus-flower (esp. a white lotus
- विज्ञानघनम् vijñānaghanam · शुद्ध ज्ञान से भरा (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: vijñāna-ghana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 961, स्तंभ 2
pure knowledge, nothing but intelligence
- तस्मात् tasmāt · इसलिए (सर्वनाम, पंचमी एकवचन (अव्यय की तरह)) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- तटिदाभमात्रम् taṭidābhamātram · बिजली जैसा ही चमकता (समास (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: taḍit, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 432, स्तंभ 1
lightning
; 2. ā-bhā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 145, स्तंभ 1ifc. like, resembling, appearing
; mātra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 804, स्तंभ 3the one thing and no more, often = nothing but, entirely, only
- ब्रह्मण्यः brahmaṇyaḥ · ब्रह्मज्ञान के प्रति समर्पित (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. brahmaṇya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 741, स्तंभ 1
relating to Brahmă or Brahmā, devoted to sacred knowledge or friendly to Brāhmans
- देवकीपुत्रः devakīputraḥ · देवकी के पुत्र (कृष्ण) (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: devakī-putra, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 495, स्तंभ 3
N. of Kṛishṇa
- ब्रह्मण्यः brahmaṇyaḥ · ब्रह्मज्ञान के प्रति समर्पित (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. brahmaṇya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 741, स्तंभ 1
relating to Brahmă or Brahmā, devoted to sacred knowledge or friendly to Brāhmans
- मधुसूदनः madhusūdanaḥ · मधुसूदन, मधु का संहार करने वाले (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: madhu-sūdana, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 780, स्तंभ 3
‘destroyer of the demon Madhu,’ N. of Vishṇu-Kṛishṇa
- ब्रह्मण्यः brahmaṇyaḥ · ब्रह्मज्ञान के प्रति समर्पित (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. brahmaṇya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 741, स्तंभ 1
relating to Brahmă or Brahmā, devoted to sacred knowledge or friendly to Brāhmans
- पुण्डरीकाक्षः puṇḍarīkākṣaḥ · कमल-नयन (विष्णु) (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: puṇḍarīkākṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 631, स्तंभ 3
‘l°-eyed,’ N. of Vishṇu or Kṛishṇa
- ब्रह्मण्यः brahmaṇyaḥ · ब्रह्मज्ञान के प्रति समर्पित (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 2. brahmaṇya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 741, स्तंभ 1
relating to Brahmă or Brahmā, devoted to sacred knowledge or friendly to Brāhmans
- विष्णुः viṣṇuḥ · विष्णु (संज्ञा (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: viṣṇu, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 999, स्तंभ 1
N. of one of the principal Hindū deities
- अच्युतः acyutaḥ · अच्युत (जो कभी च्युत नहीं होते), विष्णु का नाम (नाम के रूप में विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: a-cyuta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 9, स्तंभ 2
not fallen; firm, solid; imperishable, permanent
- इति iti · इस प्रकार (पंक्ति का अंत) (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- सर्वभूतस्थम् sarvabhūtastham · सब प्राणियों में स्थित (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; bhūta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 761, स्तंभ 3that which is or exists, any living being
; stha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1262, स्तंभ 3standing, staying, abiding, being situated in, existing
- एकम् ekam · एक (विशेषण, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: eka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 227, स्तंभ 3
alone, solitary, single, happening only once, that one only
- वै vai · निश्चय ही (बल देने वाला शब्द) (अव्यय) शब्दकोश: 2. vai, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1019, स्तंभ 3
a particle of emphasis and affirmation, generally placed after a word
- नारायणम् nārāyaṇam · नारायण को (द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
- कारणपुरुषम् kāraṇapuruṣam · कारण-रूप पुरुष (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: 1. kāraṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 274, स्तंभ 2
cause, reason, the cause of anything
; puruṣa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 637, स्तंभ 1the Supreme Being or Soul of the universe
- अकारणम् akāraṇam · जिसका कोई कारण नहीं (विशेषण, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: a-kāraṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 2, स्तंभ 1
causeless
- परम् param · परम (विशेषण, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: 1. para, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 586, स्तंभ 1
highest, supreme, chief
- ब्रह्म brahma · ब्रह्म (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: brahman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 738, स्तंभ 1
one self-existent impersonal Spirit, the one universal Soul
- ओम् om · ॐ, पवित्र अक्षर (अव्यय) शब्दकोश: om, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 235, स्तंभ 3
a word of solemn affirmation and respectful assent
- एतत् etat · यह (अंश) (सर्वनाम (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: etad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 2
this, this here, here
- अथर्वशिरः atharvaśiraḥ · अथर्ववेद का शिर (समास (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: atharvan, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 17, स्तंभ 3
the fourth or Atharva-veda
; śiras, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1072, स्तंभ 2the upper end or highest part of anything, top, peak, summit
- अधीते adhīte · अध्ययन करता है, पाठ करता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: adhī, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
to study, learn by heart, read, recite
4 छपाइयों में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- छपे संस्करण में पाठ है: प्रत्यगानन्दं ब्रह्म पुरुषं प्रणवस्वरूपम् । अकार उकारो मकार इति ।
तानेकधा समभवत्तदेतदोमिति यमुक्त्वा मुच्यते योगी जन्मसंसारबन्धनात् ।
ॐ नमो नारायणायेति मन्त्रोपासको वैकुण्ठभवनं गमिष्यति ।
तदिदं पुण्डरीकं विज्ञानघनं तस्मात्तटिदाभमात्रम् ।
ब्रह्मण्यो देवकीपुत्रो ब्रह्मण्यो मधुसूदन इति ।
सर्वभूतस्थमेकं वै नारायणं कारणपुरुषमकारणं परं ब्रह्मोम् ।
एतदथर्वशिरोऽधीते ॥ - शब्द 1923 के अड्यार, मद्रास मुद्रण में पाठ है: … ब्रह्मण्यो देवकीपुत्रो ब्रह्मण्यो मधुसूदन इति । सर्वभूतस्थमेकं वै नारायणं … 1923 की आधार छपाई (पृष्ठ 171, स्कैन पन्ना n203) में पुण्डरीकाक्ष और विष्णु अच्युत का नाम लेने वाली पंक्ति नहीं है; उसकी पादटिप्पणी यह पंक्ति 'छपी प्रति' से बताती है। दिखाया गया पाठ यह पंक्ति वैसे ही दिखाता है जैसे 1925 की छपाई इसे छापती है (निर्णय 14, बैच 10)।
- शब्द 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: प्रत्यगानन्दं ब्रह्मपुरुषं … ता अनेकधा समभवत्तदेतदोमिति । … ॐ नमो नारायणायेति मन्त्रोपासको वैकुण्ठभुवनं गमिष्यति । 1925 की छपाई में 'वैकुण्ठभवनं' ('वैकुंठ का धाम') की जगह 'वैकुण्ठभुवनं' ('वैकुंठ का लोक') और 'तानेकधा' की जगह 'ता अनेकधा' है (पृष्ठ 136, स्कैन पन्ना n148)। पुण्डरीकाक्ष और विष्णु अच्युत का नाम लेने वाली पंक्ति, जो अब दिखाई जाती है, इसी छपाई से है।
- शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: … अकार उकार मकार इति । तानेकधा समभरत्तदेतदोमिति । … मन्त्रोपासकः । वैकुण्ठभुवनलोकं गमिष्यति । तदिदं परं पुण्डरीकं विज्ञानघनम् । … ब्रह्मण्यो मधुसूदनः । ब्रह्मण्यः पुण्डरीकाक्षो ब्रह्मण्यो विष्णुरच्यत इति । सर्वभूतस्थमेकं नारायणम् । कारणरूपमकार परं ब्रह्म ॐ । एतदथर्वशिरोयोऽधीते ॥ आज का पाठ-ग्रंथ: 'उकारो' की जगह 'उकार', 'समभवत्' की जगह 'समभरत्', 'वैकुण्ठभवनं' की जगह 'वैकुण्ठभुवनलोकं', 'पुण्डरीकं' से पहले 'परं', 'वै' नहीं, 'कारणपुरुषमकारणं' की जगह 'कारणरूपमकार', और 'शिरोयोऽधीते'। इसमें पुण्डरीकाक्ष और विष्णु अच्युत का नाम लेने वाली वह पंक्ति है जिसे दिखाया गया पाठ 1925 की छपाई से दिखाता है (यह 'विष्णुरच्यत' टंकित करता है)।
श्लोक
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति । सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति ।तत्सायंप्रातरधीयानः पापोऽपापो भवति ।माध्यंदिनमादित्याभिमुखोऽधीयानः पञ्चमहापातकोपपातकात् प्रमुच्यते ।सर्ववेदपारायणपुण्यं लभते नारायणसायुज्यमवाप्नोति श्रीमन्नारायणसायुज्यमवाप्नोति य एवं वेद ॥
Prataradhiyano ratrikritam papam nashayati, sayamadhiyano divasakritam papam nashayatiTatsayamprataradhiyanah papopapo bhavatiMadhyandinamadityabhimukhodhiyanah panchamahapatakopapatakat pramuchyateSarvavedaparayanapunyam labhate narayanasayujyamavapnoti shrimannarayanasayujyamavapnoti ya evam veda
IAST
prātaradhīyāno rātrikṛtaṃ pāpaṃ nāśayati | sāyamadhīyāno divasakṛtaṃ pāpaṃ nāśayati |tatsāyaṃprātaradhīyānaḥ pāpo’pāpo bhavati |mādhyaṃdinamādityābhimukho’dhīyānaḥ pañcamahāpātakopapātakāt pramucyate |sarvavedapārāyaṇapuṇyaṃ labhate nārāyaṇasāyujyamavāpnoti śrīmannārāyaṇasāyujyamavāpnoti ya evaṃ veda ||
भावार्थ अंतिम अनुच्छेद स्वयं उपनिषद् के पाठ के बारे में है। पाठ कहता है कि सुबह इसका पाठ करने वाला रात में किए पाप नष्ट करता है, और शाम को पाठ करने वाला दिन में किए पाप नष्ट करता है; सुबह-शाम पाठ करने वाला पापी होकर भी पापरहित हो जाता है। दोपहर में सूर्य की ओर मुख करके पाठ करने वाला पाँच महापातकों और उपपातकों से छूट जाता है, सब वेदों के पारायण का पुण्य पाता है, और नारायण से, श्रीमन्नारायण से, एकता पाता है: जो यह जानता है, उसके लिए ऐसा ही है।
English meaning The last paragraph speaks of reciting the Upanishad itself. The text says that one who recites it in the morning destroys the wrongs done in the night, and one who recites it in the evening destroys the wrongs done in the day; one who recites it evening and morning becomes free of wrong even if he has done wrong. One who recites it at noon, facing the sun, is freed from the five great sins and the lesser ones, gains the merit of reciting all the Vedas, and reaches union with Narayana, with the glorious Narayana: so it is for one who knows this.
फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- प्रातः prātaḥ · सुबह (अव्यय) शब्दकोश: prātar, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 706, स्तंभ 2
in the early morning, at daybreak, at dawn
- अधीयानः adhīyānaḥ · (इसका) पाठ करते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: adhīyāna, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
reading, studying
- रात्रिकृतम् rātrikṛtam · रात में किया (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: rātri, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 876, स्तंभ 1
night, the darkness or stillness of night
; 1. kṛta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 301, स्तंभ 3done, made, accomplished, performed
- पापम् pāpam · पाप (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: pāpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 618, स्तंभ 2
sin, vice, crime, guilt
- नाशयति nāśayati · नष्ट करता है (णिजन्त, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 2. naś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 532, स्तंभ 1
to cause to be lost or disappear, drive away, expel, remove, destroy
- सायम् sāyam · शाम को (अव्यय) शब्दकोश: 1. sāya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1207, स्तंभ 2
in the evening, at eventide
- अधीयानः adhīyānaḥ · (इसका) पाठ करते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: adhīyāna, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
reading, studying
- दिवसकृतम् divasakṛtam · दिन में किया (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: divasa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 478, स्तंभ 3
a day
; 1. kṛta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 301, स्तंभ 3done, made, accomplished, performed
- पापम् pāpam · पाप (संज्ञा (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: pāpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 618, स्तंभ 2
sin, vice, crime, guilt
- नाशयति nāśayati · नष्ट करता है (णिजन्त, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 2. naś, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 532, स्तंभ 1
to cause to be lost or disappear, drive away, expel, remove, destroy
- तत् tat · इसलिए (अव्यय) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- सायंप्रातः sāyaṃprātaḥ · शाम और सुबह (अव्यय) शब्दकोश: sāyam-prātar, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1207, स्तंभ 3
in the ev° and m°
- अधीयानः adhīyānaḥ · (इसका) पाठ करते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: adhīyāna, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
reading, studying
- पापः pāpaḥ · पाप करने वाला (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: pāpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 618, स्तंभ 2
bad, vicious, wicked, evil
- अपापः apāpaḥ · पापरहित (विशेषण, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: a-pāpa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 54, स्तंभ 2
sinless, virtuous, pure
- भवति bhavati · हो जाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. bhū, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 760, स्तंभ 2
to become, be
- माध्यंदिनम् mādhyaṃdinam · दोपहर में (विशेषण (नपुंसकलिंग), द्वितीया एकवचन (अव्यय की तरह)) शब्दकोश: mādhyaṃ-dina, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 809, स्तंभ 1
belonging to midday, meridional
- आदित्याभिमुखः ādityābhimukhaḥ · सूर्य की ओर मुख किए (समास, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. āditya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 137, स्तंभ 2
N. of a god in general, especially of Sūrya (the sun)
; abhi-mukha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 67, स्तंभ 2with the face directed towards, turned towards, facing
- अधीयानः adhīyānaḥ · (इसका) पाठ करते हुए (वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: adhīyāna, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 22, स्तंभ 3
reading, studying
- पञ्चमहापातकोपपातकात् pañcamahāpātakopapātakāt · पाँच महापातकों और उपपातकों से (समास, पंचमी एकवचन) शब्दकोश: pañcan, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 578, स्तंभ 2
five
; mahā-pātaka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 797, स्तंभ 2a great crime or sin
; upa-pātaka, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 202, स्तंभ 1a secondary crime, minor offence
- प्रमुच्यते pramucyate · छूट जाता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: pra-muc, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 686, स्तंभ 3
to free one's self from (abl. or instr.)
- सर्ववेदपारायणपुण्यम् sarvavedapārāyaṇapuṇyam · सब वेदों के पारायण का पुण्य (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; 1. veda, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1015, स्तंभ 1knowledge, true or sacred knowledge or lore, knowledge of ritual
; pārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 619, स्तंभ 3going over, reading through, perusing, studying
; puṇya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 632, स्तंभ 1good work, meritorious act, moral or religious merit
- लभते labhate · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद)) शब्दकोश: labh, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 896, स्तंभ 2
to gain possession of, obtain, receive, conceive, get
- नारायणसायुज्यम् nārāyaṇasāyujyam · नारायण से सायुज्य, एकता (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3
the son of the original Man
; sāyujya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1207, स्तंभ 3intimate union, communion with
- अवाप्नोति avāpnoti · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: avāp, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 107, स्तंभ 1
to reach, attain, obtain, gain, get
- श्रीमन्नारायणसायुज्यम् śrīmannārāyaṇasāyujyam · श्रीमन्नारायण से सायुज्य (समास, द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: śrī-mat, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1100, स्तंभ 2
beautiful, charming, lovely, pleasant, splendid, glorious
; nārāyaṇa, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 536, स्तंभ 3the son of the original Man
; sāyujya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1207, स्तंभ 3intimate union, communion with
- अवाप्नोति avāpnoti · पाता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: avāp, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 107, स्तंभ 1
to reach, attain, obtain, gain, get
- यः yaḥ · जो (संबंधवाचक सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- एवम् evam · इस प्रकार, यह (अव्यय) शब्दकोश: evam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 232, स्तंभ 2
thus, in this way, in such a manner
- वेद veda · जानता है (लिट् (वर्तमान अर्थ), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. vid, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 963, स्तंभ 2
to know, understand, perceive, learn
2 छपाइयों में पाठभेद
संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।
- वर्तनी 1925 के बंबई मुद्रण में पाठ है: … तत्सायं प्रातरधीयानो पापोऽपापो भवति । मध्यंदिनमादित्याभिमुखोऽधीयानः पञ्चमहापातकोपपातकात्प्रमुच्यते । सर्ववेदपारायणपुण्यं लभते । नारायणसायुज्यमवाप्नोति … 1925 की छपाई में 'तत्सायंप्रातरधीयानः' की जगह 'तत्सायं प्रातरधीयानो', 'माध्यंदिनम्' की जगह 'मध्यंदिनम्', 'लभते' के बाद एक दंड है, और यह अनुच्छेद भाग 4 के अंक (॥ ४ ॥) के बाद बिना रुके चलता है।
- शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: … तत्सायंप्रातरधीयानोऽपापो भवति । … नारायणसायुज्यमवाप्नोति नारायण सायुज्यमवाप्नोति । य एवं वेद । इत्युपनिषत् ॥ आज के पाठ-ग्रंथ में 'ऽपापो' से पहले 'पापो' नहीं है, और वह 'श्रीमन्' के बिना दो बार 'नारायणसायुज्यमवाप्नोति' कहता है। 1923 और 1925 की छपाइयों में पाठ वैसा ही है जैसा दिखाया गया है।
संस्कृत पाठ: 1923 का अड्यार मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव
ॐ नमो नारायणाय के बारे में
इस पृष्ठ पर उपनिषद् के वे दो खंड हैं जो यह मंत्र सिखाते हैं, तीसरा और चौथा। ये 1923 में अडयार, मद्रास में छपी एक पुस्तक से पढ़े गए हैं और 1925 की बंबई की छपाई से मिलाए गए हैं। इस छपाई में उपनिषद् के चार छोटे खंड हैं; पहले दो नारायण को सब प्राणियों का स्रोत और सब कुछ बताकर उनकी स्तुति करते हैं। चौथा खंड सुबह, दोपहर और शाम उपनिषद् के पाठ के फल के साथ समाप्त होता है। चौथे खंड की एक पंक्ति, जिसमें पुण्डरीकाक्ष और अच्युत विष्णु के नाम हैं, 1923 की छपाई में केवल पाद-टिप्पणी में है; यहाँ वह वैसे दी गई है जैसे 1925 की छपाई में छपी है।
यहाँ दिए दोनों खंड मंत्र जपने वालों के लिए फल बताते हैं। ये पाठ के अपने शब्द हैं और ऐसे ही दिखाए गए हैं। 1923 की छपाई के साथ छपी टीका के लेखक, अद्वैत आचार्य उपनिषद्-ब्रह्म-योगी, इन्हें अपने ढंग से समझाते हैं, और उनकी व्याख्या संप्रदाय के नाम के साथ दी गई है। दक्षिण भारत के श्रीवैष्णवों जैसी दूसरी परंपराओं में भी इस मंत्र का मुख्य स्थान है; उनकी व्याख्याएँ यहाँ नहीं दी गईं, क्योंकि 1930 या उससे पहले की किसी छपाई में उनका स्रोत नहीं पढ़ा गया।
उच्चारण कैसे करें
बोलें "ॐ न-मो ना-रा-य-णा-य"। ॐ एक अक्षर है, नमो दो और नारायणाय पाँच: कुल आठ, जैसे उपनिषद् गिनता है। IAST पंक्ति में हर स्वर वैसे ही लिखा है जैसे वर्तनी में है।
वे पर्व, जिनकी मार्गदर्शिका में इस प्रार्थना का नाम है
विष्णु, राम और कृष्ण की और प्रार्थनाएँ
संबंधित
परिवारों के प्रश्न
ॐ नमो नारायणाय किसने लिखी?
नारायण उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद) से; रचयिता अज्ञात।
यह पृष्ठ कौन-सा पाठ मानता है?
संस्कृत पाठ: 1923 का अड्यार मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत देखें
स्रोत और लाइसेंस
- पाठ
- The Vaishnava-Upanishads with the commentary of Sri Upanishad-Brahma-Yogin (वैष्णव-उपनिषदः), edited by A. Mahadeva Sastri (A. Mahadeva Sastri (Alladi Mahadeva Sastri), Upanishad-Brahma-Yogin (Upaniṣad-brahma-yogin, also called Upaniṣad-brahmendra), The Adyar Library (Theosophical Society), Adyar, Madras, 1923). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। इन पृष्ठों का संस्कृत पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखी और उद्धृत संस्करण से मिलाई गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
- जाँच
- उद्धृत संस्करण से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।