आरती कुंजबिहारी की (अर्थ सहित)

पारंपरिक

आरती कुंजबिहारी की (Aarti Kunj Bihari Ki): आरती कुंजबिहारी की श्रीकृष्ण की आरती है, यानी वह गीत जो उनके सामने दीपक घुमाते समय गाया जाता है। इसमें उन्हें कुंजबिहारी (वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले), गिरिधर (पर्वत उठाने वाले) और मुरारी (मुर दैत्य के शत्रु) कहा गया है। परिवार इसे शाम की पूजा में और जन्माष्टमी पर गाते हैं, और कृष्ण के बहुत से मंदिरों में यह पूजा के अंत में गाई जाती है।

पाठ और अर्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति

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टेक

आरती कुंजबिहारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Arti kunjabihariki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

āratī kuṃjabihārīkī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ यह कुंजबिहारी की आरती है, यानी वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले की, जो गिरिधर (पर्वत उठाने वाले) और कृष्ण मुरारी (मुर दैत्य के शत्रु) भी हैं। गाने वाले हर पद के बाद यह पंक्ति फिर गाते हैं।

English meaning This is the aarti of Kunj Bihari, "the one who roams the groves" of Vrindavan, who is also Giridhar, "the one who held up the hill", and Krishna Murari, "the enemy of Mura". The singers sing this line again after every stanza.

पद 1

गले में बैजंतीमाला, बजावै मुरलि मधुर बाला।श्रवनमें कुण्डल झलकाला, नन्दके आनन्द नन्दलाला॥ श्रीगिरधर॰॥

Gale men baijantimala, bajavai murali madhur balaShravanmen kundal jhalkala, nandake anand nandalala shrigirdhar krishnamurariki…

IAST

gale meṃ baijaṃtīmālā, bajāvai murali madhura bālā|śravanameṃ kuṇḍala jhalakālā, nandake ānanda nandalālā|| śrīgiradhara°||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ उनके गले में वैजयंती माला है, यानी वन के फूलों की लंबी माला। बालक कृष्ण बाँसुरी पर मधुर धुन बजाते हैं। उनके कानों में कुंडल झिलमिलाते हैं। वे नंद बाबा के आनंद हैं और नंद के प्यारे लाल हैं।

English meaning Around his neck is the vaijayanti, a long garland of forest flowers. The young boy plays sweet music on his flute. Earrings sparkle in his ears. He is the joy of Nanda, his foster father, and Nanda's dear son.

3 छपाइयों में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • छपे संस्करण में पाठ है: गले में बैंजतीमाला, बजावै मुरलि मधुर बाला।
    श्रवनमें कुण्डल झलकाला, नन्दके आनन्द नन्दलाला॥ श्रीगिरधर॰॥
    बैजंतीमाला for the printed बैंजतीमाला: this typeface sets the anusvara one letter early (it does the same in कुंज); the 2009 printing has बैजंतीमाला.
  • वर्तनी 2009 के मुंबई मुद्रण में पाठ है: गलेमें बैजंतीमाला, बजावै मुरलि मधुर बाला। श्रवनमें कुण्डल झलकाला, नंदके आनँद नँदलाला॥ श्रीगिरधर॰॥ गलेमें जुड़ा हुआ; नंदके, आनँद, नँदलाला अनुस्वार और चंद्रबिंदु के साथ। स्कैन पन्ना n25 पर पढ़ा गया।
  • शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: गले में वैजन्ती माला, बजावे मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नन्द के नन्द श्री आनन्द कन्द मोहन बृज चन्द राधिका रमण बिहारी की। श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ 'नन्दके आनन्द नन्दलाला॥ श्रीगिरधर॰॥' की जगह 'नन्द के नन्द, श्री आनन्द कन्द, मोहन बृज चन्द, राधिका रमण बिहारी की'। गीता प्रेस की पुस्तिका और 2009 की खेमराज छपाई का पाठ वैसा ही है जैसा 1993 की छपाई का, इसलिए हमारा पाठ रखा गया है। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स गाए जाने वाले दोहराव भी लिखता है; वे यहाँ छोड़ दिए गए हैं।

पद 2

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,लतनमें ठाढ़े बनमाली,भ्रमर-सी अलक, कस्तूरी-तिलक, चन्द्र-सी झलक,ललित छबि स्यामा प्यारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Gagan sam ang kanti kali, radhika chamak rahi aliLatanmen tharhe banmaliBhramar-si alak, kasturi-tilak, chandra-si jhalakLalit chhabi syama pyari ki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

gagana sama aṃga kāṃti kālī, rādhikā camaka rahī ālī,latanameṃ ṭhāṛhe banamālī,bhramara-sī alaka, kastūrī-tilaka, candra-sī jhalaka,lalita chabi syāmā pyārī kī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ उनके शरीर की कांति आकाश जैसी साँवली है। उनके पास राधा शोभा पा रही हैं; "आली" (सखी) शब्द को कोई सखी को पुकार समझते हैं, तो कोई राधा को उनकी प्रिय सखी। वनमाली (वन के फूलों की माला पहनने वाले) लताओं के बीच खड़े हैं। उनके बाल भौंरों जैसे काले हैं, माथे पर कस्तूरी का तिलक है और मुख पर चंद्रमा जैसी चमक है। पंक्ति "प्यारी स्यामा" की सुंदर छवि पर पूरी होती है; ब्रज के गीतों में श्यामा राधा का नाम है, और कुछ गाने वाले इसे श्याम, यानी कृष्ण के लिए समझते हैं।

English meaning His body has the dark glow of the sky. Radha shines beside him; the word ālī, "friend", is read either as a call to a friend or as Radha, his dear companion. Banmali, "he who wears the forest garland", stands among the creepers. His curls are dark like bees, his forehead carries a musk tilak, and his face glows like the moon. The line ends on the lovely beauty of "dear Shyama"; Shyama is a name of Radha in Braj songs, and some singers hear it as Krishna, "the dark one".

2 छपाइयों में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • वर्तनी 2009 के मुंबई मुद्रण में पाठ है: गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली, लतनमें ठाढ़े बनमाली, भ्रमर-सी अलक, कस्तूरी-तिलक, चंद्र-सी झलक, ललित छबि स्यामा प्यारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥ चन्द्र की जगह चंद्र; प्यारीकी जुड़ा हुआ। स्कैन पन्ना n25 पर पढ़ा गया।
  • शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली, लसन में ठाड़े वनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की। लतन ('लताओं के बीच') की जगह लसन, शायद टंकण की भूल; श्यामा, छवि, वनमाली केवल वर्तनी हैं। गीता प्रेस की पुस्तिका में लतनमें है, जैसा छपा है।

पद 3

कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसनको तरसै,गगन सों सुमन रासि बरसै,बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिनी संग,अतुल रति गोपकुमारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Kanakamay mor-mukut bilsai, devta darasanko tarsaiGagan son suman rasi barsaiBaje murchang, madhur mirdang, gwalini sangAtul rati gopkumari ki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

kanakamaya mora-mukuṭa bilasai, devatā darasanako tarasai,gagana soṃ sumana rāsi barasai,baje muracaṃga, madhura miradaṃga, gvālinī saṃga,atula rati gopakumārī kī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ उनका सोने का मोर-मुकुट शोभा देता है, और देवता उनके दर्शन को तरसते हैं। आकाश से फूलों के ढेर बरसते हैं। मुरचंग (मुँह से बजने वाला छोटा बाजा) और मीठा मृदंग बजता है, और ग्वालिनें उनके साथ हैं। पद गोप-कुमारियों के अपार प्रेम पर पूरा होता है।

English meaning His golden crown of peacock feathers shines, and the gods long to see him. Flowers fall from the sky in heaps. The murchang (a small mouth harp) and the sweet mridang drum play, and the cowherd women are with him. The stanza ends on the boundless love of the young cowherd girls.

3 छपाइयों में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • छपे संस्करण में पाठ है: कनकमय मोर-मुकुट विलसै, देवता दरसनको तरसै,
    गगन सों सुमन रासि वरसै,
    बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिनी संग,
    अतुल रति गोपकुमारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥
    बिलसै and बरसै for the printed विलसै and वरसै: a typesetting slip (the other ब words on the page, बजे, बसी, बीच, बनवारी, have the stroke of ब); the 2009 printing has बिलसै and बरसै.
  • वर्तनी 2009 के मुंबई मुद्रण में पाठ है: कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसनको तरसै, गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिनी संग, अतुल रति गोपकुमारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥ यहाँ दिखाई गई ब वाली वर्तनियाँ; गोपकुमारीकी जुड़ा हुआ। स्कैन पन्ना n26 पर पढ़ा गया।
  • शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसै, गगन सों सुमन राशि बरसै, अजेमुरचन, मधुर मृदंग, मालिनि संग, अतुल रति गोप कुमारी की। 'बजे मुरचंग' की जगह 'अजेमुरचन' (शायद टंकण की भूल) और ग्वालिनी ('ग्वालिनें') की जगह मालिनि ('मालिनें')। गीता प्रेस की पुस्तिका में पाठ वैसा ही है जैसा छपा है।

पद 4

जहां ते प्रगट भई गंगा, सकल-मल-हारिणि श्रीगंगा,स्मरन ते होत मोह-भंगा,बसी सिव सीस, जटाके बीच, हरै अघ कीच,चरन छबि श्रीबनवारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Jahan te pragat bhai ganga, sakal-mal-harini shrigangaSmaran te hot moh-bhangaBasi siv sis, jatake bich, harai agh kichCharan chhabi shribanvariki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

jahāṃ te pragaṭa bhaī gaṃgā, sakala-mala-hāriṇi śrīgaṃgā,smarana te hota moha-bhaṃgā,basī siva sīsa, jaṭāke bīca, harai agha kīca,carana chabi śrībanavārīkī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ यह पद उनके चरणों की ओर मुड़ता है, जहाँ से गंगा प्रकट हुईं, वह पवित्र नदी जो हर मैल हर लेती है। आरती कहती है कि उनका स्मरण करने से मोह टूटता है, और वे, जो शिव के सिर पर जटाओं के बीच बसी हैं, पाप का कीचड़ धो देती हैं। पद श्रीबनवारी (वन वाले) के चरणों की छवि पर पूरा होता है।

English meaning The stanza turns to his feet, from which the Ganga came forth, the holy river that takes away every impurity. The aarti says that remembering her breaks the hold of delusion, and that she, who lives on Shiva's head in his matted hair, washes away the mud of sin. The stanza ends on the beauty of the feet of Shri Banwari, "he of the forest".

फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।

2 छपाइयों में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • वर्तनी 2009 के मुंबई मुद्रण में पाठ है: जहाँ ते प्रगट भई गंगा, सकल-मल-हारिणि श्रीगंगा, स्मरन ते होत मोह-भंगा, बसी सिव सीस, जटाके बीच, हरै अघ कीच, चरन छबि श्रीबनवारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥ जहां की जगह जहाँ। स्कैन पन्ना n26 पर पढ़ा गया।
  • शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: जहाँ से प्रगट भयी गंगा, कलुष कलि हारिणि श्री गंगा, स्मरण से होत मोह भंगा, बसी शिव शीश, जटा के बीच, हरे अघ कीच, चरण छवि श्री बनवारी की। 'सकल-मल-हारिणि' ('हर मैल को दूर करने वाली') की जगह 'कलुष कलि हारिणि' ('कलियुग के कलुष को दूर करने वाली'); ते की जगह से। गीता प्रेस की पुस्तिका में पाठ वैसा ही है जैसा छपा है।

पद 5

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही बृन्दावन बेनू,चहूं दिसि गोपि ग्वाल धेनू,हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव-फंद,टेर सुनु दीन दुखारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Chamakti ujjwal tat renu, baj rahi brindavan benuChahun disi gopi gwal dhenuHansat mridu mand, chandani chand, katat bhav-phandTer sunu din dukhariki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

camakatī ujjvala taṭa renū, baja rahī bṛndāvana benū,cahūṃ disi gopi gvāla dhenū,haṃsata mṛdu maṃda, cāṃdanī caṃda, kaṭata bhava-phaṃda,ṭera sunu dīna dukhārīkī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ नदी के तट की उजली रेत चमकती है, और वृंदावन में बाँसुरी बज रही है। चारों ओर गोपियाँ, ग्वाले और गायें हैं। वे धीरे से मुस्कुराते हैं, चाँद की चाँदनी फैली है, और आरती कहती है कि संसार के बंधन कट जाते हैं। पद इस प्रार्थना पर पूरा होता है कि वे दीन-दुखी की पुकार सुनें।

English meaning The bright sand of the river bank shines, and the flute plays in Vrindavan. On every side are the cowherd women, the cowherd men and the cows. He smiles gently, the moon gives its light, and the aarti says that the bonds of worldly life are cut. The stanza ends with a prayer that he hear the cry of a poor and troubled person.

फल की यह बात पाठ की अपनी है; पूजादीप इसका कोई वादा नहीं करता।

3 छपाइयों में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • छपे संस्करण में पाठ है: चमकती उज्ज्वल तट रेनू, वज रही बृन्दावन वेनू,
    चहूं दिसि गोपि ग्वाल धेनू,
    हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव-फंद,
    टेर सुनु दीन दुखारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥
    बज and बेनू for the printed वज and वेनू: a typesetting slip (बृन्दावन in the same line has the stroke of ब); the 2009 printing has बज and बेनू.
  • वर्तनी 2009 के मुंबई मुद्रण में पाठ है: चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही बृन्दाबन बेनू, चहूँ दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हँसत मृदु मंद, चाँदनी चंद, कटत भव-फंद, टेर सुनु दीन दुखारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥ यहाँ दिखाई गई ब वाली वर्तनियाँ; 1993 के बृन्दावन की जगह बृन्दाबन (ब के साथ), पर बृन्दावन रखा गया है; चहूँ, हँसत, चाँदनी चंद्रबिंदु के साथ। स्कैन पन्ने n26–n27 पर पढ़ा गया (दूसरी समीक्षा ने इस पाठ में बृन्दावन को सुधारकर बृन्दाबन किया)।
  • शब्द sanskritdocuments.org के आज के संस्करण में पाठ है: चमकती उज्ज्वल तट रेणु, बज रही बृन्दावन वेणु, चहुँ दिसि गोपि काल धेनु, कसक मृद मंग, चाँदनि चन्द, खटक भव भन्ज, टेर सुन दीन भिखारी की। ग्वाल की जगह काल, 'हंसत मृदु मंद' की जगह 'कसक मृद मंग', 'कटत भव-फंद' की जगह 'खटक भव भन्ज' (शायद टंकण की भूलें), और दुखारी ('दुखी') की जगह भिखारी ('भिखारी')। गीता प्रेस की पुस्तिका में पाठ वैसा ही है जैसा छपा है।

टेक

आरती कुंजबिहारीकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥

Arti kunjabihariki, shrigirdhar krishnamurariki

IAST

āratī kuṃjabihārīkī| śrīgiradhara kṛṣṇamurārīkī||

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

भावार्थ आरती अपनी टेक के साथ पूरी होती है: कुंजबिहारी की आरती, श्रीगिरधर कृष्णमुरारी की।

English meaning The aarti closes with its refrain once more, the aarti of Kunj Bihari, Shri Giridhar Krishna Murari.

1 छपाई में पाठभेद

संस्करणों के अंतर। कोई दूसरा मुद्रण या पाठ इस स्थान को अलग ढंग से पढ़ता है।

  • छपे संस्करण में पाठ है: आरती कुंजबिहारोकी। श्रीगिरधर कृष्णमुरारीकी॥ कुंजबिहारीकी for the printed 'कुंजबिहारोकी': the ी is broken in the type; the refrain on p. 117 and the 2009 printing have कुंजबिहारीकी.

हिंदी पाठ: 1993 का लखनपुर मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव

याद करें: आरती कुंजबिहारी की

. पढ़ें, फिर आँखें बंद करके बोलें।

"बोल लिया" केवल इस बार के लिए है। कोई गिनती या लगातार दिनों का हिसाब नहीं।

अंग्रेज़ी अक्षरों (IAST) में पाठ कैसे पढ़ें

आरती कुंजबिहारी की

Shri Purnavaishnavaryoday Pushpanjali, 1993. आगे बढ़ने के लिए तीर, कीबोर्ड की तीर वाली कुंजियाँ या प्रेज़ेंटेशन रिमोट का उपयोग करें।

आरती कुंजबिहारी की के बारे में

इसकी भाषा ब्रज है, यानी मथुरा-वृंदावन क्षेत्र की हिंदी। पदों में बाँसुरी और मोर-मुकुट वाले कृष्ण, उनके पास राधा, गोपियाँ और रात में चमकता यमुना-तट दिखाया गया है, और उस गंगा को याद किया गया है जो उनके चरणों से निकली। अंतिम पद में प्रार्थना है कि वे दीन-दुखी की पुकार सुनें।

यह आरती पारंपरिक है और इसमें किसी कवि का नाम नहीं है। मध्य भारत के लेखकों पर मराठी की एक पुस्तक (लगभग 1939) इसके रचयिता के रूप में बजरंगगढ़ के कवि श्रीधरराव का नाम लेती है; इसका कोई और स्रोत हमें नहीं मिला। 1930 या उससे पहले की कोई छपाई नहीं मिली। यहाँ का पाठ लखनपुर (जम्मू के पास) में 1993 में छपी नित्य पूजा की एक पुस्तक से पढ़ा गया है, और 2009 की मुंबई की एक छपाई से मिलाया गया है। उस छपाई में दूसरी पंक्ति के बाद ही टेक दोहराने का संकेत है, इसलिए यहाँ पाँच पद हैं, जहाँ बहुत सी पुस्तकों में चार होते हैं।

उच्चारण कैसे करें

पाठ ब्रज भाषा का है और ब्रज की वर्तनी रखता है: श्यामा के लिए स्यामा, शिव के लिए सिव, शीश के लिए सीस, श्रवण के लिए श्रवन। IAST पंक्ति में अक्षर वैसे ही लिखे हैं जैसे छपे हैं, शब्द के अंत का छोटा "अ" भी; गाते समय वह प्रायः नहीं बोला जाता। किसी पद के बाद छपा "श्रीगिरधर॰" संकेत है कि टेक की पंक्ति "श्रीगिरधर कृष्णमुरारी की" फिर गाई जाए।

संबंधित

परिवारों के प्रश्न

आरती कुंजबिहारी की किसने लिखी?

पारंपरिक।

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हिंदी पाठ: 1993 का लखनपुर मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत देखें

स्रोत और लाइसेंस

पाठ
Shri Purnavaishnavaryoday Pushpanjali (श्री पूर्णवैष्णवाऽऽर्योदय पुष्पांजलिः) (Shri Guru Purnagiri Sansthan (श्री गुरु पूर्णगिरिसंस्थान), Lakhanpur (Jammu), 1993). पारंपरिक प्रार्थना। पाठ: Shri Purnavaishnavaryoday Pushpanjali (श्री पूर्णवैष्णवाऽऽर्योदय पुष्पांजलिः), 1993। अनुवाद और अर्थ: हमारे अपने। इन पृष्ठों का पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
हमारी व्याख्या
इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखी और उद्धृत संस्करण से मिलाई गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
जाँच
उद्धृत संस्करण से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।
अद्यतन
27 अक्टूबर 2026

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