पर्थ। शहर बदलें

आज का पंचांग: मंगलवार, 3 नवंबर, पर्थ

कार्तिक कृष्ण नवमी (पूर्णिमांत), विक्रम संवत 2083 (गुजराती कार्तिकादि: 2082)

कृष्ण नवमी दोपहर 2:25 तक। सूर्योदय सुबह 5:17, सूर्यास्त शाम 6:43। राहु काल दोपहर 3:21–शाम 5:02।

सूर्योदय सुबह 5:18, सूर्यास्त शाम 6:42। राहु काल सुबह 6:58–8:39। पूरा दिन

पर्थ में आज का दिन

कृष्ण अष्टमी दोपहर 3:41 तक, फिर नवमी

  • सूर्योदय: सुबह 5:18
  • राहु काल: सुबह 6:58 से 8:39 तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:33 से दोपहर 12:27 तक
  • अष्टमी समाप्त: दोपहर 3:41, फिर नवमी
  • सूर्यास्त: शाम 6:42
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): शाम 6:42 से रात 8:49 तक
  • अगला सूर्योदय: सुबह 5:17, अगले दिन
  • नक्षत्र: पुष्य सुबह 7:01 तक
  • नक्षत्र: आश्लेषा 3 नवंबर, सुबह 6:17 तक
अष्टमी दोपहर 3:41 तक

तिथि चंद्र दिन है। यह तब पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है। यह क्षण हर जगह एक है, इसलिए घड़ी का समय शहर के हिसाब से बदलता है।

आने वाले दिन

पूरा पंचांग देखें
  1. गुरुवार5नवंबररमा एकादशी, व्रत
  2. शुक्रवार6नवंबरधनतेरस, पर्व
  3. शनिवार7नवंबरछोटी दिवाली, पर्व।अभ्यंग स्नान (नरक चतुर्दशी) की सुबह: कुछ पंचांग छोटी दिवाली इसी दिन देते हैं: रविवार 8 नवंबर
  4. रविवार8नवंबरदीपावली (लक्ष्मी पूजा); नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान); काली पूजा, पर्व
  5. मंगलवार10नवंबरगोवर्धन पूजा; बेसतुं वरस, पर्व

सोमवार की प्रार्थना

श्री शिव चालीसा

रीति अलग-अलग है; हर दिन की प्रार्थना आप बदल सकते हैं।

आज का श्लोक

असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् ।अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥

कृष्ण उत्तर देते हैं कि निःसंदेह मन चंचल है और उसे वश में करना कठिन है, पर अभ्यास और वैराग्य से उसे वश में किया जा सकता है। वे अर्जुन को महाबाहो और कौन्तेय कहकर पुकारते हैं।

भगवद्गीता 6.35। भावार्थ।

इस पृष्ठ के शब्द

पक्ष: शुक्ल और कृष्ण
चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
तिथि
चंद्र दिवस: वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे निकलता है। चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
नक्षत्र
चंद्रमा के मार्ग पर आकाश के 27 बराबर भागों में से एक, हर भाग 13°20′ का, किसी तारा-समूह के नाम पर।
संवत: विक्रम और शक
वर्षों की गिनती। विक्रम संवत ईसवी सन से 56 या 57 वर्ष आगे है, और शक संवत 78 या 79 वर्ष पीछे।
अभिजित मुहूर्त
दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, जो स्थानीय दोपहर के आसपास आता है। कई पंचांग बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं मानते।
राहु काल
दिन के आठ बराबर भागों में से एक, जो वार से तय होता है।

पंचांग के सभी शब्द

पर्थ का आज का पंचांग (Aaj ka Panchang)। सभी समय स्थानीय हैं (ऑस्ट्रेलियाई पश्चिमी मानक समय)। इसी शहर के लिए गणना।

आज: मंगलवार, 3 नवंबर 2026

तिथि
कृष्ण नवमी (समाप्त दोपहर 2:25), फिर दशमी (समाप्त दोपहर 1:33, अगले दिन)
नक्षत्र
आश्लेषा (समाप्त सुबह 6:17), फिर मघा (समाप्त सुबह 5:57, अगले दिन) इस नक्षत्र के नाम-अक्षर
योग
शुक्ल (समाप्त दोपहर 12:25), फिर ब्रह्म (समाप्त सुबह 10:31, अगले दिन)
करण
गरज (समाप्त दोपहर 2:25), फिर वणिज (समाप्त रात 1:56, अगले दिन), फिर विष्टि (भद्रा) (समाप्त दोपहर 1:33, अगले दिन)
वार
मंगलवार
मास
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
तमिल मास
ऐप्पसि 17 (सौर मास)
संवत
विक्रम संवत 2083 (चैत्रादि) · विक्रम संवत (कार्तिकादि, गुजराती) 2082 · शक संवत 1948
सूर्योदय
सुबह 5:17
सूर्यास्त
शाम 6:43
चंद्रोदय
रात 2:19, अगले दिन
चंद्रास्त
दोपहर 12:51
राहु काल
दोपहर 3:21 – शाम 5:02
यमगण्ड
सुबह 8:38 – सुबह 10:19
गुलिक काल
दोपहर 12:00 – दोपहर 1:41
अभिजित मुहूर्त
सुबह 11:33 – दोपहर 12:27
ब्रह्म मुहूर्त
रात 3:52 – सुबह 4:35

पर्थ में अगले 7 दिन

तारीख़ तिथि नक्षत्र सूर्योदय सूर्यास्त
मंगलवार, 3 नवंबर कृष्ण · नवमी
समाप्त दोपहर 2:25
आश्लेषा
समाप्त सुबह 6:17
सुबह 5:17 शाम 6:43
बुधवार, 4 नवंबर कृष्ण · दशमी
समाप्त दोपहर 1:33
मघा
समाप्त सुबह 5:57
सुबह 5:16 शाम 6:43
गुरुवार, 5 नवंबर कृष्ण · एकादशी
समाप्त दोपहर 1:06
पूर्व फाल्गुनी
समाप्त सुबह 6:00
सुबह 5:15 शाम 6:44
शुक्रवार, 6 नवंबर कृष्ण · द्वादशी
समाप्त दोपहर 1:01
उत्तर फाल्गुनी
समाप्त सुबह 6:26
सुबह 5:15 शाम 6:45
शनिवार, 7 नवंबर कृष्ण · त्रयोदशी
समाप्त दोपहर 1:18
हस्त
समाप्त सुबह 7:14
सुबह 5:14 शाम 6:46
रविवार, 8 नवंबर कृष्ण · चतुर्दशी
समाप्त दोपहर 1:58
चित्रा
समाप्त सुबह 8:23
सुबह 5:13 शाम 6:47
सोमवार, 9 नवंबर कृष्ण · अमावस्या
समाप्त दोपहर 3:02
स्वाती
समाप्त सुबह 9:54
सुबह 5:12 शाम 6:48

पर्थ में आने वाले त्योहार

पर्वपर्थ में तारीख़यह भी
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर
कृष्ण त्रयोदशी दोपहर 1:01, 6 नवंबर से दोपहर 1:18, 7 नवंबर तक; प्रदोष काल शाम 6:45 से रात 8:51, 6 नवंबर तक; प्रदोष काल शाम 6:46 से रात 8:51, 7 नवंबर तक
–
दीपावली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर
लक्ष्मी पूजा शाम 6:47 – रात 8:52
अमावस्या आरंभ दोपहर 1:58, 8 नवंबर; सूर्यास्त शाम 6:47, 8 नवंबर। अगले दिन अमावस्या समाप्त दोपहर 3:02, 9 नवंबर, यानी सूर्यास्त (शाम 6:48, 9 नवंबर) से पहले, इसलिए उस शाम अमावस्या नहीं है।
–
नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान) रविवार, 8 नवंबर
कृष्ण चतुर्दशी दोपहर 1:18, 7 नवंबर से दोपहर 1:58, 8 नवंबर तक; भोर से पहले का चंद्रोदय सुबह 4:14, 8 नवंबर
–
काली पूजा (बंगाली परंपरा) रविवार, 8 नवंबर
अमावस्या दोपहर 1:58, 8 नवंबर से दोपहर 3:02, 9 नवंबर तक; निशीथ काल 8 नवंबर की रात 11:39 से 12:20 तक; निशीथ काल 9 नवंबर की रात 11:39 से 12:21 तक
–
गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर
शुक्ल प्रतिपदा दोपहर 3:02, 9 नवंबर से शाम 4:30, 10 नवंबर तक; सूर्योदय सुबह 5:12, 10 नवंबर
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पर्थ में अगली एकादशी तिथियाँ

व्रत का दिन कैसे चुना जाता है · 2026 की सभी एकादशी तिथियाँ

पर्थ के लिए गणना, मंगलवार, 3 नवंबर 2026

पर्थ · 31.95° दक्षिण, 115.86° पूर्व · ऑस्ट्रेलियाई पश्चिमी मानक समय

नियम: पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण वही हैं जो सूर्योदय पर प्रभावी हों, उनके समाप्ति-समय के साथ। सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है (मानक वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ)।

आपके स्थान के लिए गणना: NASA JPL की DE440 सारणियों और Astronomy Engine सॉफ़्टवेयर (MIT लाइसेंस) से, लाहिरी अयनांश के साथ। समय छपे पंचांगों से एक-दो मिनट अलग हो सकता है। व्रत और पूजा के समय के लिए अपने परिवार या मंदिर की परंपरा मानें।

हम गणना कैसे करते हैं

परिवारों के प्रश्न

राहु काल क्या है?

राहु काल पंचांग का एक हिस्सा है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है। बहुत से परिवार इस समय नया काम शुरू नहीं करते। यह भविष्यवाणी नहीं है, और यह साइट कोई भविष्यवाणी नहीं करती। पर्थ में आज: दोपहर 3:21 – शाम 5:02।

दूसरे शहर में समय अलग क्यों होते हैं?

तिथि या नक्षत्र पूरी दुनिया के लिए एक ही क्षण में बदलता है, पर हर शहर उस क्षण को अपनी घड़ी के समय पर देखता है, और सूर्योदय-सूर्यास्त भी शहर-शहर में अलग होते हैं। इस पृष्ठ का हर समय पर्थ के लिए है, स्थानीय समय (ऑस्ट्रेलियाई पश्चिमी मानक समय) में।

यह पृष्ठ कौन-सा पंचांग नियम मानता है?

पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण वही हैं जो सूर्योदय पर प्रभावी हों, उनके समाप्ति-समय के साथ। सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है (मानक वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ)। हम पंचांग कैसे निकालते हैं

पर्थ के पास हिंदू मंदिर

अभी हमारी मंदिर-सूची में केवल अमेरिका के मंदिर हैं। दूसरे देशों के मंदिर अभी सूची में नहीं हैं।

अमेरिका के हिंदू मंदिर, राज्य के अनुसार

अन्य शहर

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