भगवद्गीता 7.6: अर्थ और अनुवाद

अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोग। कृष्ण कहते हैं

श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) 7.6: कृष्ण कहते हैं कि सब प्राणी इन्हीं दो प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं।

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श्रीमद्भगवद्गीता 7.6

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥

Etadyonini bhutani sarvanityupadharayaAham kritsnasya jagatah prabhavah pralayastatha

etadyonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya |ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayastathā ||

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भावार्थ कृष्ण कहते हैं कि सब प्राणी इन्हीं दो प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं। वे स्वयं पूरे जगत की उत्पत्ति भी हैं और प्रलय (विलय) भी।

English meaning All beings come from these two natures, Krishna says. He himself is the origin of the whole world and also its dissolution.

शब्दार्थ

हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ

शब्दार्थ

  1. एतद्योनीनि etadyonīni · इन्हीं से उत्पन्न (समास (नपुंसकलिंग), प्रथमा बहुवचन) शब्दकोश: etad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 231, स्तंभ 2 this, this here, here; yoni, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 858, स्तंभ 2 place of birth, source, origin, spring, fountain
  2. भूतानि bhūtāni · प्राणी (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा बहुवचन) शब्दकोश: bhūta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 761, स्तंभ 3 that which is or exists, any living being
  3. सर्वाणि sarvāṇi · सभी (विशेषण (नपुंसकलिंग), प्रथमा बहुवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3 whole, entire, all, every
  4. इति iti · ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1 in this manner, thus
  5. उपधारय upadhāraya · समझो (प्रेरणार्थक आज्ञार्थ (लोट्), मध्यम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: upa-dhṛ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 200, स्तंभ 1 to hold as, consider as, regard, think
  6. अहम् aham · "मैं" (कृष्ण) (सर्वनाम, प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: aham, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 124, स्तंभ 2 nom. sg. ‘I,’
  7. कृत्स्नस्य kṛtsnasya · संपूर्ण (विशेषण (नपुंसकलिंग), षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: kṛtsna, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 304, स्तंभ 3 all, whole, entire
  8. जगतः jagataḥ · जगत् का (संज्ञा (नपुंसकलिंग), षष्ठी एकवचन) शब्दकोश: jagat, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 408, स्तंभ 1 the world, esp. this world, earth
  9. प्रभवः prabhavaḥ · उत्पत्ति का कारण (संज्ञा (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: pra-bhava, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 684, स्तंभ 2 production, source, origin, cause of existence
  10. प्रलयः pralayaḥ · प्रलय, लय (संज्ञा (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: pra-laya, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 689, स्तंभ 3 dissolution, reabsorption, destruction, annihilation
  11. तथा tathā · तथा, और (अव्यय) शब्दकोश: tathā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 433, स्तंभ 3 in that manner, so, thus

पुराने अंग्रेज़ी अनुवाद

Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 74।

Know that all things have these (for their) source1. I am the producer and the destroyer of the whole universe.

  1. Cf. infra, p. 105. ↩
अंग्रेज़ी अनुवाद: K. T. Telang, The Bhagavadgîtâ (The Sacred Books of the East, vol. VIII, Oxford: Clarendon Press, 1882); सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। archive.org (पृष्ठ 74, स्कैन पन्ना n87)। जैसा छपा है, वैसा ही।
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Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 74।

Know that all things have these (for their) source1. I am the producer and the destroyer of the whole universe.

  1. Cf. infra, p. 105. ↩
अंग्रेज़ी अनुवाद: K. T. Telang, The Bhagavadgîtâ (The Sacred Books of the East, vol. VIII, Oxford: Clarendon Press, 1882); सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। archive.org (पृष्ठ 74, स्कैन पन्ना n87)। जैसा छपा है, वैसा ही।

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Annie Besant, 1895। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 76।

This the treasuring womb verily of all beings. I am the going forth of the whole universe and likewise its dissolving.

यह वाक्य 7.4 से शुरू होता है।

अंग्रेज़ी अनुवाद: Annie Besant, The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song (London: Theosophical Publishing Society, 1895); सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। archive.org (पृष्ठ 76, स्कैन पन्ना n82)। जैसा छपा है, वैसा ही।

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Swami Swarupananda, 1909 (पहली बार 1907 में छपा)। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 147।

Know that these (two Prakritis) are the womb of all beings. I am the origin and dissolution of the whole universe.

अंग्रेज़ी अनुवाद: Swami Swarupananda, Srimad-Bhagavad-Gita (Mayavati: Prabuddha Bharata Press, 1909; first printed in Prabuddha Bharata, 1907–1909); सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। archive.org (पृष्ठ 147, स्कैन पन्ना n155)। जैसा छपा है, वैसा ही।

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इस श्लोक का हवाला दें

अनुवाद: K. T. Telang, The Bhagavadgîtâ (The Sacred Books of the East, vol. VIII, Oxford: Clarendon Press, 1882), पृष्ठ 74। भगवद्गीता 7.6।

अनुवाद: Annie Besant, The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song (London: Theosophical Publishing Society, 1895), पृष्ठ 76। भगवद्गीता 7.6।

अनुवाद: Swami Swarupananda, Srimad-Bhagavad-Gita (Mayavati: Prabuddha Bharata Press, 1909; first printed in Prabuddha Bharata, 1907–1909), पृष्ठ 147। भगवद्गीता 7.6।

हमारी व्याख्या: “भगवद्गीता 7.6: अर्थ और अनुवाद”। पूजादीप। अद्यतन 27 अक्टूबर 2026। https://pujadeep.com/hi/bhagavad-gita/7/6/

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संस्कृत पाठ: 1922 का मद्रास मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव

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यह श्लोक कृष्ण कहते हैं, अध्याय 7 (ज्ञानविज्ञानयोग) में।

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स्रोत और लाइसेंस

संस्कृत पाठ
The Bhagavad-Gita, or The Lord's Song, with the text in Devanagari and an English translation (Annie Besant, G. A. Natesan & Co., Madras, 1922). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। इन पृष्ठों का संस्कृत पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
अनुवाद
The Bhagavadgîtâ with the Sanatsugâtîya and the Anugîtâ, translated by Kâshinâth Trimbak Telang (The Sacred Books of the East, vol. VIII, ed. F. Max Müller) (Kashinath Trimbak Telang, F. Max Müller, Clarendon Press, Oxford, 1882). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
अनुवाद
The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song, translated by Annie Besant (Annie Besant, Theosophical Publishing Society, London, 1895). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
अनुवाद
Srimad-Bhagavad-Gita, with Sanskrit Text; Paraphrase with Word-by-word Literal Translation; English Rendering and Comments, Index, &c., by the Swami Swarupananda (Himalayan Series, No. XX) (Swami Swarupananda, The Editors and Publishers, Advaita Ashrama, Mayavati, Prabuddha Bharata Press, Mayavati, Almora, Himalayas, 1909). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
प्रचलित पाठ
इस पाठ में 32 शब्द आज के प्रचलित रूप में हैं; इन्हें sanskritdocuments.org; संस्कृत विकिस्रोत; गीता प्रेस, गोरखपुर; ग्रेटिल, गॉटिंगेन और भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट के पाठ से मिलाकर जाँचा गया।
हमारी व्याख्या
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जाँच
उद्धृत संस्करण से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।
अद्यतन
27 अक्टूबर 2026

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