भगवद्गीता 6.18: अर्थ और अनुवाद
अध्याय 6: ध्यानयोग। कृष्ण कहते हैं
श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) 6.18: कृष्ण कहते हैं कि जब भली-भाँति वश में किया हुआ चित्त केवल आत्मा में स्थित रहता है, और किसी भी कामना की वस्तु के लिए लालसा नहीं रहती, तब व्यक्ति को युक्त कहा जाता है।
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श्रीमद्भगवद्गीता 6.18
यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते ।निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥
Yada viniyatam chittamatmanyevavatishthateNihsprihah sarvakamebhyo yukta ityuchyate tada
yadā viniyataṃ cittamātmanyevāvatiṣṭhate |niḥspṛhaḥ sarvakāmebhyo yukta ityucyate tadā ||
भावार्थ कृष्ण कहते हैं कि जब भली-भाँति वश में किया हुआ चित्त केवल आत्मा में स्थित रहता है, और किसी भी कामना की वस्तु के लिए लालसा नहीं रहती, तब व्यक्ति को युक्त कहा जाता है।
English meaning When the well-controlled mind rests in the self alone, free from craving for any object of desire, then a person is called 'joined in yoga' (yukta), Krishna says.
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- यदा yadā · जब (अव्यय) शब्दकोश: yadā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 1
when, at what time, whenever
- विनियतम् viniyatam · भली प्रकार वश में किया (भूतकालिक कृदन्त (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: vi-niyata, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 970, स्तंभ 2
restrained, checked, regulated
- चित्तम् cittam · चित्त (संज्ञा (नपुंसकलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: citta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 395, स्तंभ 3
the heart, mind
- आत्मनि ātmani · आत्मा में (संज्ञा (पुंलिंग), सप्तमी एकवचन) शब्दकोश: ātman, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 135, स्तंभ 1
the individual soul, self
- एव eva · ही (अव्यय) शब्दकोश: 1. eva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 232, स्तंभ 2
just, exactly, very, same, only, even, alone, merely
- अवतिष्ठते avatiṣṭhate · ठहरता है (वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: ava-sthā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 105, स्तंभ 3
to stay, abide, stop at any place (loc.)
- निःस्पृहः niḥspṛhaḥ · इच्छा रहित (विशेषण (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: niḥ-spṛha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 539, स्तंभ 2
free from desire, not longing for
- सर्वकामेभ्यः sarvakāmebhyaḥ · सब कामनाओं से (समास (पुंलिंग), पंचमी बहुवचन) शब्दकोश: sarva, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1184, स्तंभ 3
whole, entire, all, every
; kāma, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 271, स्तंभ 3wish, desire, longing
- युक्तः yuktaḥ · योग से युक्त (भूतकालिक कृदन्त (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yukta, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 853, स्तंभ 2
yoked or joined or fastened or attached or harnessed
- इति iti · ऐसा (अव्यय) शब्दकोश: 2. iti, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 1
in this manner, thus
- उच्यते ucyate · कहा जाता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: vac, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 912, स्तंभ 1
to be called or accounted, be regarded as
- तदा tadā · तब (अव्यय) शब्दकोश: tadā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 3
at that time, then, in that case
पुराने अंग्रेज़ी अनुवाद
Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 69।
When (a man's) mind well restrained becomes steady upon the self alone, then he being indifferent to all objects of desire, is said to be devoted.
3 अनुवादों की तुलना करें
Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 69।
When (a man's) mind well restrained becomes steady upon the self alone, then he being indifferent to all objects of desire, is said to be devoted.
आप यही पढ़ रहे हैं
Annie Besant, 1895। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 68।
When his subdued thought is fixed on the SELF, free from longing after all desirable things, then it is said, "he is harmonised."
आप यही पढ़ रहे हैं
Swami Swarupananda, 1909 (पहली बार 1907 में छपा)। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 130।
When the completely controlled mind rests serenely in the Self alone, free from longing after all desires, then is one called steadfast, (in the Self).
आप यही पढ़ रहे हैं
इस श्लोक का हवाला दें
अनुवाद: K. T. Telang, The Bhagavadgîtâ (The Sacred Books of the East, vol. VIII, Oxford: Clarendon Press, 1882), पृष्ठ 69। भगवद्गीता 6.18।
अनुवाद: Annie Besant, The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song (London: Theosophical Publishing Society, 1895), पृष्ठ 68। भगवद्गीता 6.18।
अनुवाद: Swami Swarupananda, Srimad-Bhagavad-Gita (Mayavati: Prabuddha Bharata Press, 1909; first printed in Prabuddha Bharata, 1907–1909), पृष्ठ 130। भगवद्गीता 6.18।
हमारी व्याख्या: “भगवद्गीता 6.18: अर्थ और अनुवाद”। पूजादीप। अद्यतन 25 अक्टूबर 2026। https://pujadeep.com/hi/bhagavad-gita/6/18/
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संस्कृत पाठ: 1922 का मद्रास मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव
परिवारों के प्रश्न
गीता 6.18 कौन कहता है?
यह श्लोक कृष्ण कहते हैं, अध्याय 6 (ध्यानयोग) में।
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संस्कृत पाठ: 1922 का मद्रास मुद्रण। अर्थ: पूजादीप के लिए लिखे और जाँचे गए। स्रोत देखें
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स्रोत और लाइसेंस
- संस्कृत पाठ
- The Bhagavad-Gita, or The Lord's Song, with the text in Devanagari and an English translation (Annie Besant, G. A. Natesan & Co., Madras, 1922). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। इन पृष्ठों का संस्कृत पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
- अनुवाद
- The Bhagavadgîtâ with the Sanatsugâtîya and the Anugîtâ, translated by Kâshinâth Trimbak Telang (The Sacred Books of the East, vol. VIII, ed. F. Max Müller) (Kashinath Trimbak Telang, F. Max Müller, Clarendon Press, Oxford, 1882). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
- अनुवाद
- The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song, translated by Annie Besant (Annie Besant, Theosophical Publishing Society, London, 1895). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
- अनुवाद
- Srimad-Bhagavad-Gita, with Sanskrit Text; Paraphrase with Word-by-word Literal Translation; English Rendering and Comments, Index, &c., by the Swami Swarupananda (Himalayan Series, No. XX) (Swami Swarupananda, The Editors and Publishers, Advaita Ashrama, Mayavati, Prabuddha Bharata Press, Mayavati, Almora, Himalayas, 1909). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
- प्रचलित पाठ
- इस पाठ में 32 शब्द आज के प्रचलित रूप में हैं; इन्हें sanskritdocuments.org; संस्कृत विकिस्रोत; गीता प्रेस, गोरखपुर; ग्रेटिल, गॉटिंगेन और भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट के पाठ से मिलाकर जाँचा गया।
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर लिखी और उद्धृत संस्करण से मिलाई गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर आप इसे उद्धृत कर सकते हैं।
- जाँच
- उद्धृत संस्करण से मिलाया गया, 15 अक्टूबर 2026।
- अद्यतन
- 25 अक्टूबर 2026